अलोपीशंकरी मंदिर शक्तिपीठ के परिसर में बने मकानों को ध्वस्त करने के लिए जारी नोटिस वापस ले लिए गए। यह जानकारी इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीडीए के वकील ने दी। इस पर कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने का हलफनामा दााखिल करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 21 नवंबर नियत की है।
न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की अदालत सोनिया सिंह व सात अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची अलोपीमंदिर परिसर में बने मकानों में वर्षों से रहते हैं। इस दौरान पीडीए ने ध्वस्तीकरण के नोटिस चस्पा कर दिए थे। इस कार्रवाई के खिलाफ लोगों ने कमिश्नर के यहां प्रार्थना पत्र दिया। इस पर कमिश्नर ने मामले को पीडीए को स्थानांरित कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याची के वकील मनीषा चतुर्वेदी ने दलील दी कि यह जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड की है। याची यहां चार दशक से मकान बनाकर रह रहे हैं। पीडीए को इस पर कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है। इसने अवैध नोटिस भेजे हैं। ध्वस्तीकरण से 20 परिवार प्रभावित होंगे। इनके पुनर्वास के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही याचियों को सुनवाई का मौका दिए बगैर पीडीए ने अवैध कार्रवाई शुरू कर दी है। याचिका में ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। पीडीए इस जमीन में कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता।