उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से 20 जुलाई को जारी किए गए पीसीएस जे-2018 के अंतिम चयन परिणाम में दिव्यांग वर्ग के एक अभ्यर्थी का न्यूनतम कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद चयन नहीं हुआ। मामला सामने आने के बाद चयन प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वहीं, प्रतियोगी छात्रों ने मांग की है कि कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद चयन से वंचित रह गए अभ्यर्थी का पीसीएस जे के पद पर चयन किया जाए।
आयोग ने 12 सितंबर को पीसीएस जे-2018 के अंतिम चयन परिणाम का कटऑफ जारी किया है। इसमें दिव्यांग वर्ग में पीबी का न्यूनतम कटऑफ 361, पीडी का न्यूनतम कटऑफ 388 और ओए/ओएल/बीए का न्यूनतम कटऑफ 453 अंक है लेकिन ओए/ओएल/बीए वर्ग की ओबीसी श्रेणी में आने वाले दिव्यांग अभ्यर्थी आलोक चौरसिया का 463 अंक होने के बावजूद उन्हें चयन से वंचित कर दिया गया। प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि पीसीएस जे-2018 में भ्रष्टाचार एवं अनियमितता हुई है।
छात्रों का कहना है कि कुछ अन्य अभ्यर्थियों का भी न्यूनतम कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद चयन नहीं हुआ है लेकिन वे खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि आयोग भविष्य की परीक्षाओं में उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। उधर, आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि ऐसी कोई भी शिकायत आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और पता लगाया जाएगा कि आखिर किस कारण से अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ।