पूर्व सैनिकों को 1993 से पहले भी मिल रहा रहा था भर्तियों में आरक्षण
याची के अधिवक्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि 1993 से पहले पूर्व सैनिकों को सभी ग्रुप ए, बी, सी और डी की भर्तियों में आरक्षण दिया जा रहा था। ए व बी ग्रुप में आठ फीसदी और बी व सी में तीन फीसदी का आरक्षण दिया जा रहा था। 1993 के बाद नए आरक्षण नियम लागू होने से पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी आरक्षण दिया जाने लगा। बाद में ए व बी ग्रुप में आरक्षण दिया जाना बंद कर दिया गया। इस पर सतीश चंद्र शुक्ला की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से कहा गया था कि इस मामले में सरकार की ओर से विचार किया जा रहा है।
इस पर कोर्ट ने पांच फीसदी का आरक्षण दिए जाने का आदेश दिया था। उसी आदेश के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने 2021 के संशोधित गजट नोटिफिकेशन के तहत पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था बनाई लेकिन उसका पालन न करने पर यह याचिका दाखिल की गई। याचिका में पीसीएस-2021 और वन विभाग में सहायक वन संरक्षक के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण दिए जाने की मांग की गई। कोर्ट ने याची के तर्कों को स्वीकार करते हुए पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम रद्द कर दिया और पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी का आरक्षण का लाभ देते हुए संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया है।