इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएस-2021 प्रारंभिक परीक्षा परिणम रद्द किए जाने के मामले में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई टालते हुए मामले में 23 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी ने दिया।
इसके पूर्व मंगलवार को नियमित खंडपीठ के न बैठने से मामले को सुनवाई के लिए दूसरी (उक्त) खंडपीठ के समक्ष भेजा गया। भोजनावकाश के पूर्व खंडपीठ ने सुनवाई की। आयोग की ओर से सुनवाई के लिए कुल 75 से अधिक आधार बनाए गए थे।
पीठ ने भोजनावकाश के बाद सुनवाई के लिए दोबारा पेश करने के लिए कहा। दोबारा सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि एकल पीठ ने तथ्यों को पूरी तरह से देखा नहीं और एकतरफा फैसला पारित किया। हालांकि, प्रतिवादी के अधिवक्ता एबीएन त्रिपाठी ने तथ्यों को खारिज किया। कोर्ट ने मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से दाखिल विशेष याचिका के औचित्य पर सवाल खड़े किए। कहा कि उसे नियमों और कानूनों का पालन करना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि मामले को नियमित खंडपीठ के समक्ष ही प्रस्तुत किया जाए और सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि निर्धारित कर दी। इसके पूर्व प्रतिवादी अधिवक्ता की ओर से जवाबी हलफनामा फाइल किया गया, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।
आयोग पीसीएस-2021 भर्ती परीक्षा में पांच अगस्त को साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। अभ्यर्थियों को अपने परिणाम का इंतजार है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने भर्ती प्रक्रिया में पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी आरक्षण न देने पर प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि आयोग पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी का आरक्षण देते हुए नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी करे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी है। उस पर सुनवाई जारी है। बुधवार को नियमित खंडपीठ न होने से मामले की दूसरी खंडपीठ के समक्ष भेजा गया था।