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Prayagraj : 13 दिनों में तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, मौनी अमावस्या पर उमड़ेगा सैलाब

Fri, 16 Jan 2026 12:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मेला आरंभ होने से लेकर मकर संक्रांति पर्व तक बीते 13 दिनों में संगम में तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। इसमें पौष पूर्णिमा के दिन 31 लाख, मकर संक्रांति से पहले 85 लाख और मकर संक्रांति पर करीब एक करोड़ की संख्या शामिल हैं।
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संगम तट पर उमड़ रहा आस्था का सैलाब। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मेला आरंभ होने से लेकर मकर संक्रांति पर्व तक बीते 13 दिनों में संगम में तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। इसमें पौष पूर्णिमा के दिन 31 लाख, मकर संक्रांति से पहले 85 लाख और मकर संक्रांति पर करीब एक करोड़ की संख्या शामिल हैं। इसके अलावा प्रतिदिन सात से आठ लाख लोगों ने स्नान किया।

मकर संक्रांति पर संगम तट पर देश-विदेश से आस्था का जनसागर उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के बीच श्रद्धालु संगम स्नान के लिए आगे बढ़ते रहे। संगम नोज पर पुलिस ने श्रद्धालुओं को जिस दिशा से वे आए, उसी के नजदीकी घाटों पर स्नान कराने की व्यवस्था की।

मेला क्षेत्र के बाहर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। सिर पर गठरी, कंधे पर बैग, हाथों में बच्चों और महिलाओं को थामे श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ते रहे। मौसम भी अनुकूल रहा, जिससे श्रद्धालुओं के उत्साह में और वृद्धि हुई।

व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए घाटों पर बालू की बोरियां रखी गईं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के चेंजिंग रूम की भी बेहतर व्यवस्था की गई थी। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने जल में ही सूर्य को अर्घ्य दिया और घाट किनारे धूप, दीप व अगरबत्ती जलाकर पूजा-अर्चना की। तीर्थ पुरोहितों से तिलक-चंदन लगवाया और गोदान भी किया। श्रद्धालुओं ने खुले धूप में बैठकर लाई, लड्डू, पूरी-सब्जी और चूड़ा का प्रसाद भी ग्रहण किया।

गंगाजल और रेती का प्रसाद लेकर लौटे श्रद्धालु

 

संगम स्नान के बाद घर लौटते वक्त श्रद्धालु संगम का पवित्र जल और रेती का प्रसाद ले जाते नजर आए। बिहार के सिवान से आईं सरस्वती देवी और केदारनाथ गुप्ता, दिल्ली की प्रियंका अग्रवाल और मोहित अग्रवाल, बंगाल की अनारी और मुनिया, मध्य प्रदेश के जगदीश रावत, राजस्थान के पिंटू चौधरी और महाराष्ट्र की रेनू भल्ला ने बताया कि वे स्नान के बाद गंगाजल साथ ले जा रहे हैं।

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