प्रयागराज ।कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए किए गए लॉक डाउन में ऐसे बहुत से लोगों को एक अलग तरह के संकट में लाकर खड़ा कर दिया है जो आजीविका चलाने के लिए रोजमर्रा की आमदनी पर निर्भर है। हाई कोर्ट, जिला अदालत और अधिकरण आदि स्थानों में टाइपिंग, स्टेनोग्राफी और फोटो स्टेट ,स्टेशनरी बेचने का काम करने वाले हजारों लोगों के सामने भी यही संकट है ।इनका रोजगार अदालतों की खुले रहने पर चलता है ।अदालत बंद हुई तो आमदनी भी बंद हो गई ।हाईकोर्ट के गेट संख्या 4 और 5 के सामने पटरी पर प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर ,फोटोस्टेट की दुकानों ,स्टेशनरी बेचने वालों की पूरी मंडी लगती है ।यहां कंप्यूटर टाइपिंग की दर्जनों दुकानें हैं जिनमें सैकड़ों कंप्यूटर ऑपरेटर दिन भर बैठ कर याचिकाएं, एप्लीकेशन और दूसरे टाइपिंग का काम करते हैं ।वकील इनके ग्राहक है ।अदालत खुली होने पर काम इतना होता है कि सिर उठाने की फुर्सत नहीं मिलती। इससे इनको दिन भर में ठीक ठाक आमदनी हो जाती है। इसके अलावा बहुत से ऑपरेटर और स्टेनो वकीलों के चैम्बरों से सीधे जुड़े हैं । वकीलों के चेंबर में जरूरत भर काम मिल जाता है। मगर इन दिनों सब ठप है ।लॉक डाउन के कारण इन हजारों ऑपरेटरों और दुकानदारों के पास पिछले महीने भर से कोई काम नहीं है। लिहाज़ा जरूरत का खर्च चलाना भी मुहाकिल है। हाई कोर्ट गेट संख्या 3 के सामने फोटोस्टेट और टाइपिंग की दुकान चलाने वाले धीरज बताते हैं काम ठप होने से आमदनी पूरी तरह से बंद हो गई है ।लिहाजा ऑपरेटरों और कर्मचारियों को देने भर को पैसे नहीं है । क्योंकि उनकी कमाई भी रोजाना होने वाली आमदनी पर ही निर्भर होती है। कचहरी में कंप्यूटर टाइपिंग का काम करने वाले श्याम भी तंगहाली में है ।बताते हैं कि होली के पहले से ही काम मंदा था । इसके बाद लॉक डाउन ने तो सब कुछ ठप कर दिया है कचहरी खुली रहने पर रोजमर्रा का खर्च चलाने पर की आमदनी हो जाती थी मगर अब तो एक पैसे की भी आमदनी नहीं है। सैकडों का पलता है पेट I हाइकोर्ट एक संस्था ही नहीं, बल्कि इसके सहारे हज़ारों लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अपनी आजीविका चलाते है। चाय बेचने वाले दुकानदार से लेकर फल का ठेला लगाने वाले और होटल , लॉज तथा रेस्टोरेंट चलने वालो तक की आमदनी हाइकोर्ट की वजह से ही होती है। ज्यादा परेशानी छोटा व्यवसाय करने वालो को है जो रोज़ाना की आमदनी पर निर्भर है।