मोबाइल में गेम खेलता बच्चा (सांकेतिक तस्वीर)
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ऑनलाइन गेम बच्चों के दिलोदिमाग पर हावी है। पढ़ाई-लिखाई में बिल्कुल मन नहीं लग रहा है। ऐसी लत देखने को मिल रही है कि इसके लिए कोई खाते से पैसे उड़ा दे रहा तो कोई आत्महत्या का भी प्रयास कर रहा है। यह हम नहीं, बल्कि मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) के मन कक्ष व स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के मनोरोग विभाग में हर माह 30 से अधिक आ रहे मामले बयां कर रहे हैं। मोबाइल छीनने पर वह कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इससे सबसे ज्यादा 10 से 12 वर्ष के बच्चे प्रभावित हैं। कुछ ऐसे ही मामले नजीर के तौर पर हैं।
केस-1
प्रीतमनगर निवासी 13 वर्षीय किशोर ऑनलाइन गेम का शौकीन था। गेम के तीसरे स्टेज पर अपने खिलाड़ी को वर्दी और बंदूक दिलाने के लिए 70 हजार रुपये की आवश्यकता पड़ी। बच्चे ने पिता के एटीएम की जानकारी ऑनलाइन डालकर रुपये कटा दिए। पिता को जानकारी हुई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे लेकर चार माह पहले कॉल्विन के मन कक्ष पहुंचे। वहां उसका इलाज चल रहा है।
केस-2
नैनी निवासी 15 वर्षीय किशोर ऑनलाइन गेम के दस में से आठ स्टेज पार कर चुका था। 9वीं पर गेम हारा तो उसने खाना-पीना, हंसना-बोलना व खेलना-कूदना सब बंद कर दिया। पहले तो माता-पिता को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ। लेकिन, तीन माह बाद काउंसलिंग कराई तो उसने कहा, गेम हारने से बहुत परेशान है। उसका मन करता है कि नदी में कूदकर जान दे दे। बच्चे का इलाज चल रहा है।
केस-3
नैनी का सात वर्षीय बालक लाख समझाने के बावजूद माता-पिता के मोबाइल पर चुपके से गेम स्टॉल कर लेता था। कुछ दिनों के बाद वह गुमसुम रहने लगा। चिंतित परिजन बालक को लेकर कॉल्विन के मन कक्ष पहुंचे तो पता चला कि गेम के सिवाय उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। मायूस बैठा रहेगा, लेकिन गेम खेलने का मौका मिलते ही खुशी से झूम उठेगा।
सतर्कता
1- बैंक डिटेल्स साझा करने से बचें
2- बाहर खेलने को कहें
3- हॉबी फॉलो करने का परामर्श दें
4- अकेलापन न महसूस होने दें
10 से 20 साल के बच्चे ऑनलाइन गेम के अधिक शिकार हैं। इन्हें लगता है कि यही उनकी दुनिया है। वह इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। ऐसे में इनको जरूरी होने पर ही मोबाइल दें, लेकिन निगाह बनाए रखें। - डॉ.राकेश पासवान, मनोचिकित्सक, कॉल्विन
मोबाइल पर कई प्रकार के गेम उपलब्ध हैं। यह कई स्टेज के होते हैं, जिन्हें पार करने के चक्कर में बच्चे वास्तविक दुनिया से दूर हो जाते हैं। उन्हें गेम की दुनिया ही सही लगती है। ऐसे में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। - डॉ.अभिनव टंडन, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसआरएन