नई व्यवस्था के तहत प्रतिष्ठित पद्मश्री की तर्ज पर अब रेलमंत्री अवार्ड के लिए रेलकर्मियों को खुद ही एचआरएमएस पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस नए नियम का फायदा यह होगा कि अफसर के चहेते कर्मचारी इनाम नहीं ले सकेंगे। उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे में कार्यरत रेलकर्मियों को छह सितंबर तक फॉर्म भरना होगा।
रेलमंत्री पुरस्कार को ही अब अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार भी कहा जाता है। नए नियमों में अब किसी भी रेल कर्मचारी को पुरस्कार स्वरूप नकद राशि नहीं दी जाएगी। अधिकारियों, कर्मचारियों को अब सिर्फ मेडल और सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवेदन के लिए निर्धारित प्रोफार्मा भी तैयार किया गया है। उसमें रेलकर्मी या अफसरों को यह खुद बताना होगा कि उन्हें पुरस्कार क्यों दिया जाए। एक स्क्रीनिंग कमेटी आवेदनों की जांच कर कर्मचारियों के नाम को लेकर निर्णय लेगी। वहीं, नाम जोनल रेलवे की ओर से रेलवे बोर्ड को भेजे जाएंगे।
वहीं, जोनल रेलवे की ओर से बोर्ड को नाम भेजे जाने की अंतिम तिथि 14 सितंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद बोर्ड 27 सितंबर को अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार जिन्हें दिया जाना है, उसकी सूची जारी करेगा। उत्तर मध्य रेलवे के सीनियर पीआरओ डॉ.अमित मालवीय ने कहा कि पहली बार रेलमंत्री पुरस्कार के लिए आवेदन मांगा गया है। नई व्यवस्था के तहत जीएम अवार्ड का नाम विशिष्ट रेल सेवा अवार्ड एवं डीआरएम अवार्ड का नाम रेल सेवा पुरस्कार कर दिया गया है।