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Prayagraj : सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की परिक्रमा संग अखंड सौभाग्य व्रत, संगम में लगाई डुबकी

Mon, 15 Jun 2026 05:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अधिकमास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर सोमवार को संगम क्षेत्र में हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर धर्म लाभ अर्जित किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगल कामना की।
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पुरूषोत्तम महीने के अंतिम दिन कड़ा के कुबरी घाट पर गंगा स्नान करते श्रद्वालु। - फोटो : संवाद।
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अधिकमास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर सोमवार को संगम क्षेत्र में हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर धर्म लाभ अर्जित किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगल कामना की।

शक्तिपीठ ललिता देवी मंदिर में पीपल के वृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने पीपल की 108 बार परिक्रमा कर अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। परिक्रमा के लिए किसी ने आम तो किसी ने बिस्कुट और मेवे से फेरी लगाई। फेरी के बाद व्रती महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगा कर प्रसाद वितरित किया। महिलाओ ने पूजा संपन्न होने के बाद बुजुर्गों का आशीर्वाद भी लिया। ललिता देवी मंदिर के पुजारी शिव मूरत मिश्रा ने बताया कि सोमवती अमावस्या और अधिकमास का संयोग अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिससे इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व बढ़ जाता है।

अलोपी देवी मंदिर, सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन तथा न्यायविद हनुमान मंदिर में भी फेरी लगाने को महिलाओं की भीड़ जुटी। परिक्रमा के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। न्याय विद हनुमान मंदिर के पुजारी अखिलेश शुक्ला ने कहा कि सोमवती अमावस्या पर किए गए धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।

इस अवसर पर शिवकुटी के पंडित हेमंत शुक्ला और मीरापुर शिव मन्दिर के पंडित धीरज पांडे ने श्रद्धालुओं को अमावस्या के धार्मिक महत्व और पूजन-विधि की जानकारी दी। इस दौरान शहर के विभिन्न मंदिर परिसर में हुए भजन-कीर्तन में श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर किया। दिनभर मंदिरों और संगम क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य का क्रम चलता रहा। सोमवती अमावस्या और अधिकमास के दुर्लभ संयोग ने शहर के धार्मिक वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया, जिससे पूरे दिन शहर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।

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