इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग के चेयरमैन प्रो.बीएल मेहरा और अन्य विपक्षी पार्टियों को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पूर्व में दिए गए एकल पीठ के आदेश का पालन कर हलफनामा दाखिल करें या पालन करने या उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए कारण बताएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने डॉ.भाग्यश्री एस और तीन अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर दिया है। आजमगढ़ निवासी याची केएलएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, लखनऊ में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थी। बाद में स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। वहीं, याचियों ने केएलएस मेडिकल कॉलेज के अनुभव का विवरण एनसीआईएसएम (राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग) पोर्टल पर प्रस्तुत किया,लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याचियों के पक्ष में फैसला सुनाया और केएलएस मेडिकल कॉलेज में दी गई सेवा के अनुभव पर विचार करने का निर्देश दिया। इसका पालन नहीं किए जाने पर उक्त अवमानना अर्जी दाखिल की।
याची अधिवक्ता अतुल कुमार श्रीवास्तव ने दलील दी कि कोर्ट की ओर से पांच अप्रैल 2025 को रिट याचिका में पारित आदेश का पालन अभी तक नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला अवमानना अधिनियम-1971 के तहत विचारण योग्य है। कोर्ट ने विपक्षी पार्टी को निर्देश दिया है कि वे नोटिस प्राप्त होने के एक महीने के भीतर कोर्ट के आदेश का या तो पालन करें और हलफनामा दाखिल करें या अगली निर्धारित तारीख तक यह कारण बताएं कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। अगली सुनवाई पांच जनवरी 2026 को होगी।