परमार्थ निकेतन शिविर में आयोजित कीवा कुंभ में 5 महाद्वीपों से आए जनजाति लीडर्स ने संगम स्नान किया।
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पूरी दुनिया से स्नानार्थियों व सैलानियों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। श्रद्धालुओं और सैलानियों ने त्रिवेणी संगम में स्नान करने के साथ ही मेला क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं का अवलोकन किया। महाकुंभ केवल मनुष्य ही नहीं, पक्षियों व जीव-जंतुओं के कल्याण का भी मार्ग प्रशस्त कर रहा एक महाआयोजन है जिसका हिस्सा बनकर वह खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं।
दिल्ली से त्रिवेणी संगम में स्नान करने आईं मोनिका ने बताया कि यह मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत पल है। उन्होंने कहा कि इतने लोगों को एका साथ आस्था की डोर में बंधकर त्रिवेणी संगम में स्नान करते देखना अविस्मरणीय क्षण था।
दिल्ली से ही आईं शीघ्र बंसल ने कहा कि मैं पहली बार कुम्भ के आयोजन में प्रयागराज आई हूं। उन्होंने कहा कि मैं ज्यादा आध्यात्मिक व्यक्ति नहीं हूं इसके बावजूद यहां की दिव्य आध्यात्मिक व सकारात्मक ऊर्जाओं को अनुभूत कर सकी। यहां पर जिस प्रकार सकुशल जन प्रबंधन हो रहा है इसके लिए स्थानीय प्रशासन बधाई का पात्र है।
सुमिता वाही ने बताया कि मैं आध्यात्मिक अभिरुचि रखती हूं इसलिए मेरे लिए यह एक बेहद विशिष्ट क्षण है। उन्होंने कहा कि यहां इतनी अपार भीड़ जुटी हुई है मगर सभी सकारात्मक ऊर्जा से भरे हुए हैं।
यूके से आईं एमा ने बताया कि मैं पहली बार रत आई हूं। उन्होंने कहा कि मेले में दिव्यता को अनुभूत करने के साथ यहां आयोजित हुए बर्ड फेस्टिवल को भी देखने का अवसर उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता के साथ ही पर्यावरण और जैविक संरक्षण की दिशा में हो रहे कार्यों की जितनी प्रशंसा हो वह कम है।