इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साहित्य भवन पब्लिकेशंस के फंड में हेराफेरी और धोखाधड़ी मामले में आरोपी कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। कहा, मामला प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और गबन का प्रतीत होता है। ऐसे में विस्तृत जांच जरूरी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने गोविंद निगम व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक के साथ एफआईआर रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामला आगरा के बाह थाना क्षेत्र का है। आरोप है कि साहित्य भवन पब्लिकेशंस के कर्मचारियों ने अपने परिजनों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले और कंपनी के 71,38,797 रुपये उनमें ट्रांसफर कर दिए।
याचियों के वकील ने दलील दी कि यह हेराफेरी दरअसल कंपनी के मालिक की मिलीभगत से की गई थी। तर्क दिया गया कि कंपनी का खर्च बढ़ाकर दिखाने और टैक्स देनदारी कम करने के उद्देश्य से यह राशि ट्रांसफर की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने दलील मानने से इन्कार कर दी। याचिका खारिज कर स्पष्ट किया कि याची जमानत या अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए स्वतंत्र है।