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PRSU :  राज्य विवि के कॉलेजों में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, रोजगार परक पाठ्यक्रमों की सीटों पर बढ़ाने पर जोर

Sun, 05 May 2024 03:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राज्य विश्वविद्यालय परिसर में कई ऐसे पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहे हैं, जो संघटक महाविद्यालयों में नहीं हैं। एलएलएम, एमसीए, एमएससी एग्रीकल्चर एग्रोनॉमी की पढ़ाई केवल राज्य विवि परिसर में हो रही है। सत्र 2024-25 से परिसर में बीफार्मा और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड बीटेक एवं एमटेक ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डाटा साइंस की पढ़ाई भी शुरू होने जा रही है।
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रज्जू भैया राज्य विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रो.राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों में सत्र 2024-25 से कुछ नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेजों का स्थलीय निरीक्षण शुरू कर दिया है। संबद्धता समिति कॉलेजों के आवेदनों पर निर्णय भी ले रही है। जल्द ही संबद्धता की अंतिम लिस्ट जारी की जाएगी। वहीं, संबद्धता के लिए आवेदन की तिथि 31 मई तक बढ़ा दी गई है।

राज्य विश्वविद्यालय परिसर में कई ऐसे पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहे हैं, जो संघटक महाविद्यालयों में नहीं हैं। एलएलएम, एमसीए, एमएससी एग्रीकल्चर एग्रोनॉमी की पढ़ाई केवल राज्य विवि परिसर में हो रही है। सत्र 2024-25 से परिसर में बीफार्मा और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड बीटेक एवं एमटेक ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डाटा साइंस की पढ़ाई भी शुरू होने जा रही है।

ये पांचों पाठ्यक्रम राज्य विवि के संघटक महाविद्यालयों में नहीं हैं। इसके अलावा महाविद्यालयों में कई ऐसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनकी सीटों की संख्या बहुत ही समिति है। राज्य विवि के प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी एवं फतेहपुर में 703 संघटक महाविद्यालय हैं। इन महाविद्यालयों में बीएससी बायोटेक की महज 60 सीटें हैं। वहीं, एमएड, एमपीएड एवं एमएससी एग्रीकल्चर हॉर्टीकल्चर की केवल 50-50 सीटें हैं।

इसके अलावा एमएससी एग्रीकल्चर स्वॉयल साइंस, एमएससी जेनेटिक एंड प्लांट ब्रीडिंग एवं एमएससी एग्रीकल्चर एक्सटेंशन की 30-30 और एमएससी एग्रीकल्चर इकनॉमिक्स की महज 20 सीटें हैं। राज्य विवि के संघटक महाविद्यालयों में साढ़े पांच लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। कॉलेजों में रोजगारपरक विषयों की मांग है। ऐसे में कई कॉलेजों ने नए विषयों की संबद्धता के लिए आवेदन कर रखे हैं।

ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने पर ज्यादा जोर है, जो कॉलेजों में नहीं हैं या जिनकी सीटें काफी कम हैं। नए विषयों की संबद्धता को हरी झंडी तभी मिलेगी, जब विश्वविद्यालय की संबद्धता समिति इस पर अपनी मुहर लगा देगी। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेजों को स्थलीय निरीक्षण शुरू करा दिया है, ताकि यह तस्दीक की जा सके कि नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए कॉलेज अनिवार्य अर्हताएं पूरी कर रहे हैं या नहीं।

राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कॉलेजों कॉलेजों के निरीक्षण के आधार पर आ रही रिपोर्ट पर निर्णय लेने के लिए संबद्धता समिति की कुछ बैठकें हो चुकी हैं। नए विषयों की संबद्धता के लिए आवेदन करने वाले सभी कॉलेजों का स्थलीय निरीक्षण पूरा होने के बाद संबद्धता से संबंधित लिस्ट जारी कर दी जाएगी।

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