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NCR Railway : प्रयागराज-मुंबई रेल मार्ग भी कवच से होगा लैस, एनसीआर के 348 इंजन कवच से हो गए हैं लैस

Thu, 28 Nov 2024 03:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

एनसीआर में स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली यानी कवच को कुछ जगह लगाया भी जा चुका है। प्रयागराज के सूबेदारगंज में कवच लगा दिया गया है। पूरे जोन में तीन हजार किलोमीटर रूट पर कवच सबसे पहले लगेगा। इसके अलावा यहां से गुजरने वाली 700 से अधिक ट्रेनों में कवच का इंस्टालेशन होना है।
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स्पेशल ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई रूट के साथ अब प्रयागराज-मुंबई रूट भी कवच से लैस होगा। उत्तर मध्य रेलवे की बात करें तो इरादतगंज से मानिकपुर तक 1640 करोड़ की लागत से तीसरी लाइन बिछाए जाने के साथ यहां कवच 4.0 को भी इंस्टाल किया जाएगा।

इसके बाद इस रूट पर अन्य रेलखंडों पर संबंधित जोनल रेलवे द्वारा भी कवच को इंस्टाल किया जाएगा। ताकि निकट भविष्य में इस पूरे रूट पर ट्रेनों को अधिकतम 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाया जा सके। महाकुंभ संपन्न होने के बाद उत्तर मध्य रेलवे द्वारा इरादतगंज-मुंबई रूट पर कवच से जुड़े कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है।

एनसीआर में स्वचलित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली यानी कवच को कुछ जगह लगाया भी जा चुका है। प्रयागराज के सूबेदारगंज में कवच लगा दिया गया है। पूरे जोन में तीन हजार किलोमीटर रूट पर कवच सबसे पहले लगेगा। इसके अलावा यहां से गुजरने वाली 700 से अधिक ट्रेनों में कवच का इंस्टालेशन होना है। बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय स्तर पर कुल नौ हजार तकनीशियन की प्रशिक्षित टीम 10 हजार लोकोमोटिव इंजन में कवच लगाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

पहले एक लोकोमोटिव में कवच लगाने में कुल 14 दिन का समय लगता था लेकिन अब उन्नत तकनीक की वजह से एक दिन में ही यह इसके इंस्टालेशन की प्रक्रिया हो जा रही है।फिलहाल एनसीआर के 348 इंजनों में कवच इंस्टाल हो गया है। मथुरा से पलवल के बीच 80 किमी लंबे रेलमार्ग पर कवच का ट्रायल भी हो गया है। अब दिल्ली-हावड़ा रूट के दिल्ली-कानपुर और कानपुर -प्रयागराज रेलखंड पर इसका कार्य हो रहा है।

स्टेशन एरिया के रेलवे ट्रैक पर आरएफआईडी टैग्स, स्टेशनरी कवच यूनिट, ट्रैक के पास टावर एवं एंटिना लगाने का तकरीबन 75 फीसदी कार्य हो गया है। एनसीआर के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी का कहना है कि कवच पर तेजी से कार्य चल रहा है। ट्रेनों की संरक्षा और सुरक्षा के लिए यह जरूरी है।

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