समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी एवं माध्यमिक शिक्षा के पूर्व निदेशक बासुदेव यादव ने एमएलसी चुनाव में मैदान मार लिया। उन्होंने इलाहाबाद-कौशाम्बी स्थानीय प्राधिकारी चुनाव में भाजपा के रईश चंद्र शुक्ला को 257 मतों से शिकस्त देकर विधान परिषद पहुंचने का रास्ता तय किया। वहीं, तीसरे नंबर पर रहे निर्दल प्रत्याशी चंद्र दत्त को कुछ पड़े वैध मतों का एक फीसदी भी नहीं मिला। मतगणना के दौरान तहसील सदर परिसर के बाहर काफी गहमागहमी का माहौल रहा। भाइपाइयों और सपाइयों के बीच कई बार भिड़ंत की नौबत आई। स्थिति काबू में करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं। मतगणना स्थल के भीतर भी दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच तनातनी का माहौल बना रहा। बासुदेव की जीत के बाद सपाइयों ने जुलूस निकालकर जश्न मनाया और आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं। सपा के जॉर्जटाउन स्थित कार्यालय के बाहर हवा में दागी गईं गोलियों की आवाज भी लोगों ने सुनी। चर्चा रही कि बासुदेव यादव की जीत पर हर्ष फायरिंग की गई थी।
स्थानीय प्राधिकारी चुनाव की मतगणना रविवार सुबह आठ बजे से तहसील सदर के सभागार में आरओ एवं डीएम संजय कुमार और एआरओ एवं एडीएम प्रशासन आरएन गुप्ता की देखरेख में शुरू कराई गई। इस दौरान प्रेक्षक भी मौजूद थे। अनौपचारिक रूप से नतीजे दोपहर 12 बजे के आसपास सामने आ गए और सपाइयों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। हालांकि आधिकारिक रूप से दोपहर एक बजे के बाद परिणाम घोषित किया गया और डीएम ने सपा के विजयी प्रत्याशी बासुदेव यादव को प्रमाणपत्र सौंपा। इससे पूर्व मतगणना के दौरान वैध एवं अवैध मत को लेकर मतगणना स्थल के भीतर सपा और भाजपा प्रत्याशियों के बीच कई बार नोकझोंक हुई। डीएम के आदेश पर कुछ एजेंटों को मतगणना स्थल के बाहर कर दिया गया लेकिन कुछ देर बाद उन्हें दोबारा प्रवेश दे दिया गया। इस बीच मतगणना स्थल के बाहर भी भाजपा और सपा के समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी और इसके साथ तनाव भी। दोनों पक्षों में भिड़ंत की नौबत आई तो पुलिस को लाठियां भांजकर भीड़ को खदेड़ना पड़ा।
चुनाव में कुल 4051 वैध मत पड़े, जिनमें सपा के बासुदेव यादव को 2138, भाजपा के रईश चंद्र को 1881 और निर्दल प्रत्याशी चंद्र दत्त शुक्ला को 32 वोट मिले। इसके लिए अलावा 283 मत अवैध घोषित किए गए जबकि आठ वोट ‘नोटा’ की श्रेणी में रहे। यानी आठ वोटरों ने तीनों प्रत्याशियों को नकार दिया। बासुदेव की जीत के लिए सपाइयों ने जमकर जश्न मनाया और पटाखे भी फोड़े। हर्ष फायरिंग की भी बात सामने आई लेकिन सपाइयों और अफसरों ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया।
आधिकारिक रूप से न सही लेकिन एमएलसी के चुनाव को सत्ता का चुनाव माना जाता है। ऐसे में सपा एवं भाजपा प्रत्याशी के बीच नजदीकी लड़ाई और जीत-हार के अंतर से अधिक वोटों के अवैध घोषित हो जाने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सपा के बासुदेव यादव ने भाजपा के रईस चंद्र शुक्ला को 257 मतों से हराया जबकि 283 वोट अवैध घोषित किए गए। आखिर अवैध घोषित किए गए वोट किसके पक्ष में दिए गए थे। इनकी संख्या इतनी अधिक है कि ये वोट जीत-हार का समीकरण बदल सकते थे।