एसआरएन अस्पताल की पार्किंग में कार के भीतर मृत मिले डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की मौत दम घुटने की वजह से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण मृत्यु से पूर्व दम घुटना आया है। दम घुटने की वजह क्या रही, इस बाबत अभी जांच पड़ताल बाकी है। उधर, दवा के असर का पता लगाने के लिए विसरा जांच के लिए भेज दिया गया है।
देर रात तक इस मामले में परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई थी। इससे पहले सुबह मर्चरी पर उन्होंने साजिश की आशंका जताई थी। रविवार दोपहर बाद डॉक्टर के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
सूत्रों का कहना है कि पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर की मौत का कारण एंटी मॉर्टम स्टैंगुलेशन आया। यानी, दम घुटने की वजह से उनकी मौत हुई। जानकारों का कहना है कि दम घुटने का कारण हाथों या रस्सी जैसी किसी वस्तु से गला दबाया जाना भी हो सकता है, हालांकि, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सूत्रों का यह भी कहना है कि पोस्टमार्टम में उनके शरीर के भीतरी अंगों में झुलसने के निशान भी मिले हैं। इसकी वजह वह दवा रही या कुछ और, इसकी जांच के लिए विसरा एफएसएल भेज दिया गया है।
डॉक्टर के हाथ व गले में जख्म के निशान भी मिले हैं। पुलिस अफसरों ने आशंका जताई है कि कैनुला (दवा इंजेक्ट करने के लिए हाथ में लगाए जाने वाला उपकरण) व गले में नली लगाने का भी प्रयास भी इसकी वजह हो सकती है।
फिलहाल इस मामले में देर रात तक पुलिस तहरीर न मिलने की बात कहती रही। डीसीपी नगर अभिषेक भारती ने बताया कि विस्तृत जांच पड़ताल में ही दम घुटने के कारण का पता चलेगा। घरवाले जो भी तहरीर देंगे, उस आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
परिजन बोले- साथी डॉक्टर से हुआ था विवाद
इससे पहले सुबह मर्चरी पहुंचे परिजनों ने डॉक्टर की मौत में साजिश की भी आशंका जताई। बताया कि चार-पांच दिन पहले कार्तिकेय के साथ पढ़ने वाले एक डॉक्टर से विवाद हुआ था। कार्तिकेय पढ़ाई में काफी तेज था और इसी बात को लेकर डॉक्टर उसके भाई से प्रतिस्पर्धा रखता था। दाखिले के समय भी एक बार विवाद हुआ था। हालांकि, उसके बाद मामला शांत हो गया था।
यह है पूरा मामला
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कार्तिकेय श्रीवास्तव (27) शनिवार रात 10.30 बजे के करीब एसआरएन अस्पताल के पार्किंग एरिया में अपनी कार के भीतर मृत पड़े मिले थे। कार में एनेस्थीसिया में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन के दो वाॅयल और सिरिंज भी मिलीं। वह मूल रूप से अपर कालाबड़, जिला कोटद्वार, उत्तराखंड के रहने वाले थे और मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेजिडेंट-2 के पद पर तैनात थे।