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High Court : साइबर ठगी में RBI के नियम को कवच बनाएं, तलवार नहीं, गबन के रुपये ब्याज सहित दिलाने की मांग खारिज

Sat, 19 Jul 2025 08:06 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी के लिए ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करना बैंक का दायित्व है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का यह नियम ग्राहक को साइबर ठगी से सुरक्षा तभी प्रदान कर सकता है जब वह इस नियम का प्रयोग कवच की तरह करे, तलवार की तरह नहीं।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी के लिए ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करना बैंक का दायित्व है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का यह नियम ग्राहक को साइबर ठगी से सुरक्षा तभी प्रदान कर सकता है जब वह इस नियम का प्रयोग कवच की तरह करे, तलवार की तरह नहीं। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति पीके गिरी की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी सुरेश चंद्र नेगी और अन्य की याचिका खारिज कर दी।

मामले के मुताबिक, याची पिता और पुत्र ने दावा किया कि उनके खातों से करीब 37 लाख 85 हजार रुपये गबन कर लिए गए। साइबर ठगी के जरिए पैसा एक तीसरे व्यक्ति के खाते में पहुंच गया। मामले में उन्होंने एफआईआर भी दर्ज कराई पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से रुपया ब्याज समेत वापस दिलाने की गुहार लगाई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचियों के खाते से हुए लेनदेन उनकी जानकारी में हुए थे। उन्होंने लाभार्थी को खुद अपने खाते से जोड़ा था। अगर ठगी हुई तो भी उन्होंने बैंक को तत्काल कोई जानकारी नहीं दी थी। ठगी की कहानी रचने के लिए पुलिस को भी देरी से सूचना दी। लिहाजा, याची के खाते में हुए लेनदेन के लिए वह खुद जिम्मेदार हैं। रिजर्व बैंक का सर्कुलर ग्राहकों का सुरक्षा कवच है लेकिन इसका दुरुपयोग करके गबन की गई राशि वसूलने का प्रयास नहीं किया जा सकता। यह सर्कुलर सुरक्षा कवच है, तलवार नहीं।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

1. कोर्ट ने साफ किया कि आरबीआई सर्कुलर के अनुसार, अगर कोई ग्राहक समय पर बैंक को जानकारी दे देता है, तो उसकी देयता शून्य हो जाती है।

2. ग्राहक की गलती साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की है। ग्राहक को दोषी बताने से पहले बैंक को सबूत देने होंगे।

अगर ऑनलाइन बैंकिंग में कोई गड़बड़ी होती है तो बैंक तभी बच सकता है जब वह साबित कर दे कि ग्राहक की गलती थी। वरना बैंक को नुकसान की भरपाई करनी होगी लेकिन ग्राहक की भी जिम्मेदारी है कि वह बैंक को समय पर जानकारी दे, वरना कोर्ट भी राहत नहीं देगा : हाईकोर्ट

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