साधु-संतों के साथ ज्ञान की गहरी जड़ों के रूप में संगम तट पर स्थित अक्षयवट, पातालपुरी, सरस्वती कूप के साथ भरद्वाज आश्रम और द्वादश माधव मंदिर कॉरिडोर के विकास की परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि लैंड स्केपिंग, साइनेज के साथ ही तीर्थों के प्रवेश द्वारों का भी निर्माण कराया जा रहा है। इसके तहत प्रमुख मंदिरों का भी विकास प्रस्तावित है। इसमें नागवासुकि मंदिर, अलोपशंकरी देवी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, पंडिला महादेव मंदिर, कोटेश्वर महादेव मंदिर, कल्याणी देवी मंदिर तथा तक्षक तीर्थ शामिल हैं।
इसके अलावा विकास परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि इनर रिंग रोड, प्रयागराज-रायबरेली-लखनऊ मार्ग, प्रयागराज-अयोध्या और प्रयागराज-बांदा राजमार्ग पर पड़ने वाली रेलवे क्रॉसिंग जसरा में बाईपास के निर्माण के साथ एयरपोर्ट के विस्तारीकरण और सूबेदारगंज में रेल ओवरब्रिज का भी निर्माण प्रस्तावित है।
जगदगुरुओं के नाम पर मुहल्लों का नामकरण करने का अखाड़ा परिषद ने दिया सुझाव
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने राम गमन मार्ग का सूचक के रूप में भी परिलक्षित करने, महर्षि भारद्वाज द्वारा किए गए कार्यों का और प्रचार-प्रसार करने, शंकराचार्य द्वार बनाने, वेणी माधव की परिक्रमा की व्यवस्था के साथ मोहल्लों का नामकरण जगदगुरुओं के नाम पर करने का प्रस्ताव दिया। इस पर अफसरों ने अमल करने का भरोसा दिया। महानिर्वाणी अखाड़ा के यमुनापुरी ने पेशवाई मार्गों से लटकते हुए विद्युत तारों को हटाने का सुझाव दिया। अन्य संतों ने तीर्थ यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने संतों से महाकुंभ की सफलता के लिए आशीर्वाद और सहयोग मांगा।