प्रयागराज के शिवकुटी इलाके में भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा अनूठा मंदिर हैं, जहां वो न्यायाधीश के रूप में विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तों को उनके कर्मों पर फैसला और न्याय करते हैं। देवाधिदेव का यह अद्भुत मंदिर शिव कचहरी के नाम से प्रसिद्ध है। सावन के महीने में यहां पर भक्तों की भारी भीड़ होती है। इस मंदिर में एक - दो नहीं, बल्कि 286 शिवलिंग हैं। इनमें एक शिवलिंग मुख्य न्यायाधीश के रूप में हैं तो बाकी दूसरे जजों और वकील के रूप में हैं। शिव कचहरी मंदिर में भगवान शिव के भक्त जाने- अनजाने में हुई गलतियों की माफी मांगने और उसका प्रायश्चित करने के लिए आते हैं। कोई चिट्ठी लिखकर अर्जी लगाता है तो कोई शब्दों के जरिए गुहार करता है। कोई कान पकड़कर तो कोई उठक -बैठक करके अपनी गलतियों लिए क्षमा प्रार्थना करता है। शिव कचहरी मंदिर की स्थापना नेपाल के राणा जनरल पद्मजंग बहादुर ने 1865 में की थी।