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अधिग्रहीत जमीन पर बना दिए लोहिया आवास

Fri, 11 Mar 2016 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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लो‌ह‌िया आवास - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सरकारी योजनाओं के नाम पर अंधेरगर्दी और लूटखसोट कैसे होती है, देखना है तो करछना चले जाइए। जनप्रतिनिधियों और अफसरों की मिलीभगत से पावर प्लांट की जमीन पर करोड़ों रुपये की लागत से इंदिरा आवास और लोहिया आवास बनवानेे के साथ तमाम सुविधाएं मुहैया करा दी गईं जबकि सभी जानते थे कि इस जमीन पर पावर प्लांट का निर्माण होना है। निर्माण के लिए सरकार ने रकम तो जारी कर ही दी, लाभार्थियों ने भी अपना अंशदान लगा दिया। अब पावर प्लांट का निर्माण शुरू हो गया है। जल्द ही वहां बने इंदिरा और लोहिया आवासों पर बुल्डोजर चला दिया जाएगा और सरकार के करोड़ों रुपये घोटाले की भेंट चढ़ जाएंगे।
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करछना पावर प्लांट के लिए जिन आठ गांवों की जमीन अधिग्रहीत की गई है, उनमें भगेसर देहली गांव भी शामिल है। सभी आठ गांवों की जमीन करछना पावर प्लांट के लिए वर्ष 2007 में ही अधिग्रहीत की जा चुकी है। कोई भी जनप्रतिनिधि हो या अफसर, हर कोई यह अच्छी तरह से जानता है कि अधिग्रहीत भूमि पर पावर प्लांट के अलावा और कोई निर्माण नहीं कराया जा सकता। सबको यह भी मालूम था कि अधिग्रहीत जमीन के लिए मुआवजा भी दे दिया गया है। इसके बावजूद 2012-13 में भगेसर देहली गांव को डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के लिए चयनित किया गया। गांव की जमीन पर तकरीबन 90 लोहिया आवास स्वीकृत किए गए और इनके निर्माण के लिए सरकार ने रकम भी जारी कर दी। 

प्रत्येक आवास के लिए सरकार की ओर से सवा-सवा लाख रुपये दिए गए। साथ ही 10-10 हजार रुपये सोलर लाइटों के लिए दिए गए। इसके अलावा इंदिरा आवास के लिए भी लाखों रुपये जारी किए गए। 134 शौचालयों के निर्माण की मंजूरी मिल गई। सीसी रोड भी बनवा दी गई। गांव के चयन और वहां लोहिया आवास के निर्माण सहित अन्य सुविधाओं पर न तो तत्कालीन एसडीएम और बीडीओ ने कोई आपत्ति जताई और न ही किसी अन्य अधिकारी ने इसे रोकने की कोशिश की। लेखपाल भी अपनी रिपोर्ट पक्ष में लगा दी। तत्कालीन ग्राम प्रधान से लेकर सत्ता पक्ष के तमाम लोगों को यह अनियमितता नजर नहीं आई जबकि हर कोई जानता था कि जिस दिन पावर प्लांट का निर्माण शुरू हुआ, उस दिन वहां सब कुछ ध्वस्त कर दिया जाएगा और इसके साथ ही करोड़ों रुपये का खर्च अनुपयोगी साबित होगा। सबकुछ जानते हुए इस गांव का लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में चयन का मतलब है कि गांव का चयन विकास के लिए नहीं, बल्कि घोटाले के लिए किया गया।
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भगेसर देहली गांव में मंजूरी के बाद भी कई लोहिया आवासों का निर्माण नहीं कराया गया जबकि इसके लिए रकम जारी कर दी गई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित आवासों के लिए जारी रकम कौन हजम कर गया। इसी तरह संपर्क मार्गों और सीसी रोड के साथ शौचालयों के निर्माण के लिए भी रकम जारी की गई लेकिन बड़ी संख्या में सीसी रोड और शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। सूत्रों के मुताबिक इन मामलों में भी जारी की गई रकम का कोई हिसाब-किताब नहीं।

चयन के दौरान भगेसर देहली गांव की स्थिति
जनसंख्या-1262
पुरुष-685
महिला-577
कुल परिवार-350
सामान्य/ओबीसी परिवार-300
एससी परिवार-50
बीपीएल के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार-119

‘अधिग्रहीत जमीन पर आवास कैसे बने और गांव का चयन किस आधार पर हुआ। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।’ संजय कुमार, जिलाधिकारी
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