प्रयागराज। राजस्थान के तमाम जिलों में सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद करने के बाद टिड्डी दल झांसी ललितपुर के रास्ते मध्यप्रदेश के सतना और रीवा जिले तक पहुंच गया है। दो पड़ोसी जिलों में टिड्डी दल के आने के बाद प्रयागराज में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। कृषि विभाग और उद्यान विभाग की ओर से लगातार फसल सुरक्षित रखने के लिए एडवाइजरी भी जारी की जा रही है।
कृषि विभाग की ओर से सोमवार को टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए तमाम दिशा निर्देश जारी किए गए । कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि सोमवार 1 जून तक प्रयागराज जिले में टिड्डी दल का कोई प्रकोप नहीं है, लेकिन जनपद की सीमा से लगे मध्य प्रदेश के रीवा और सतना जिले में टिड्डी दल की मौजूदगी की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि टिड्डी दल से प्रकोप से बचने एवं फसलों को इन टिड्डियों से दूर रखने के लिए किसानों को अपने खेत के आसपास धुआं करना होगा ।पटाखा बजाने ढोल नगाड़ा, ड्रम, डीजे आदि के शोर से भी टिड्डी दल को अपने खेतों उसे दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच हरे पत्तों, झाड़ियों एवं फसलों पर आकर बैठ जाते हैं ।यह रात में ही फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। फिर सुबह उड़ान भरते हैं। टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए रक्षा रसायनो का तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह से पावर स्प्रेयर, फुट स्प्रेयर, ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर मशीन एवं अग्निशमन टैंकर वाहन द्वारा छिड़काव किया जा सकता है। पिछले दिनों उद्यान विभाग की ओर से भी बताया गया था कि रासायनिक पदार्थ का प्रयोग करके भी टिड्डी दल के आक्रमण से फसलों को बचाया जा सकता है। इसमें मेलाथियान 50 प्रतिशत, ईसी मेलाथियान 25 प्रतिशत, डब्ल्यूपी क्लारोपयरीफास 20 प्रतिशत, ईसी और क्लारोपयरीफास 50 प्रतिशत को टिड्डी के हमलों को रोकने के लिए शाम को पानी में पतला घोलकर फसलों पर कीटनाशक के रूप में छिड़काव करना चाहिए।