बंदी की हत्या के आरोपी को मिली उम्रकैद रद्द
हाईकोर्ट ने दिया रिहा करने का आदेश
प्रयागराज। जेल में बंद दोषसिद्ध बंदी की ईट से मारकर हत्या करने के आरोपी सेवक को हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप से बरी कर दिया है। उसे सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। आरोपी सेवक को सत्र न्यायालय वाराणसी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा है कि जिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई गई है, उनकी कड़ियां टूटी हुईं हैं। अभियोजन संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने सेवक की जेल अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर न्यायमित्र राधेश्याम यादव ने बहस की। केंद्रीय कारागार वाराणसी में 14-15 सितंबर 2008 की रात एक बजे बैरक में सिद्धदोष बंदी राजाराम के सिर पर ईंट से मार कर गंभीर चोट पहुंचाई गई। उसे गंभीर हालत में अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान मौत हो गई। बंदी सेवक पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया गया। हत्या के आरोप में शिवपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद गवाह नहीं है। परिस्थितियां भी ठोस साक्ष्य नहीं बता रही है। आरोपी पर आरोप सिद्ध नहीं होता । ऐसे में वह संदेह का लाभ पाने का अधिकारी है।