विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम के तौर पर संगम की रेती पर छह महीने बाद लगने वाले महाकुंभ मेले का लेआउट तैयार कर लिया गया है। स्वच्छता, सुरक्षा और हरीतिमा पर केंद्रित इस महाकुंभ के लिए शहर में कई जगह पूजास्थल भी विकसित किए जाएंगे। महाकुंभ की संस्कृति और इससे जुड़े वैभव की जानकारी एप और वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी। महाकुंभ को स्वच्छ बनाने के लिए जहां व्यापक उपाय किए जा रहे हैं, वहीं हरित महाकुंभ के लिए 1.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे। यह निर्णय मंडलायुक्त के गांधी सभागार में प्रयागराज मेला प्राधिकरण की 18वीं बोर्ड की बैठक में लिया गया।
इस बार का महाकुंभ कई मायनों में यादगार और अविस्मरणीय होगा। पहली बार चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में महाकुंभ बसाने की योजना तैयार की गई है। सुविधा और बसावट के लिहाज से इसे 25 सेक्टर में विभाजित किया जाएगा। कुंभनगरी में प्रवेश के लिए गंगा पर 30 पांटून पुल बनाए जाएंगे। पांटून पुलों का नामकरण भी तीर्थों और देवी-देवताओं के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है।
महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के उपायों पर काम शुरू हो गया है। बुधवार को प्रयागराज मेला प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में महाकुंभ -2025 को लेकर कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने सबसे पहले महाकुंभ का लेआउट प्रस्तुत किया। बताया कि इस बार टेंट सिटी में 1200 की जगह 2000 टेंट्स लगाए जाएंगे। सर्किट हाउस तीन से बढ़ाकर पांच स्थानों पर बनाने का निर्णय लिया गया है।
सर्किट हाउस की कुल क्षमता लगभग 250 टेंट की होगी। रैन बसेरा भी 25,000 श्रद्धालुओं के लिए बनाया जाएगा। इस बार अरैल से फाफामऊ के बीच ग्रीन, क्लीन और सुरक्षित महाकुंभ विश्व समुदाय के लिए अनुकरणीय होगा। इस बैठक में मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, डीएम नवनीत सिंह चहल, पीडीए उपाध्यक्ष अरविंद चौहान, नगर आयुक्त चंद्रमोहन गर्ग रहे।