प्रवचन करते कवि डॉ. कुमार विश्वास।
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जरा हल्के गाड़ी हांको, मेरे राम गाड़ी वाले...घनश्याम गाड़ी वाले कविता पर मंगलवार की शाम गंगा पंडाल भाव विभोर हो उठा। सामाजिक विद्रूपता को रेखांकित करतीं इन पंक्तियों के जरिये रामकथा मर्मज्ञ डॉ. कुमार विश्वास ने नई पीढ़ी के लोभ और अंहकार पर तंज कसा। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि इच्छाओं को काबू में रखो, वरना शौक गुनाहों में बदल जाते हैं। लिहाजा, चकाचौंध के इस दौर में नई पीढ़ी अपने मन की चंचलता पर काबू पाने के लिए मन में राम को बसाए। ताकि, उनके जीवन की गाड़ी संभल-संभल कर चले।
भारत सरकार और संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में महाकुंभ मेला क्षेत्र में आयोजित राम कथा ''अपने-अपने राम'' में तीसरे दिन डॉ. कुमार विश्वास ने रावण-अंगद संवाद का वर्णन किया।कहा, जब रावण ने अंगद से कहा कि राम वनवासी और मैं लंकापति मेरी उनसे क्या तुलना है। कहां वो और कहां मैं। अंगद ने जवाब दिया... अंकल सही कहा अपने कहां आप और कहां वो।
अंगद की ओर से व्यंग्यात्मक अंदाज में दिए गए जवाबों की काव्य प्रस्तुति से डॉ. विश्वास ने जमकर तालियां बटोरीं। उन्होंने भरत के प्रसंगों का भी उल्लेख किया। कहा कि भरत जैसा भाई पाने के लिए राम बनना पड़ता है। इससे पहले गंगा पंडाल में भारतीय सेना की ओर से सेना के संगीतकारों को श्रद्धांजलि दी गई। भारतीय सेना, जबलपुर के ग्रैंडियर्स रेजिमेंटल सेंट्रल बैंड और आर्मी एजुकेशन कॉर्प्स सेंटर एंड ट्रेनिंग के जवानों ने शुभारंभ में स्वागत गीत मंगलगान की धुन से वातावरण को राष्ट्रभक्ति से सराबोर किया।
कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में असम गौरव और संगीत ज्योति जैसे पुरस्कार से अलंकृत शास्त्रीय नृत्य को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले रामकृष्ण तालुकदार ने देवदासी शीर्षक से महादेव व भगवान विष्णु को समर्पित नृत्य का प्रदर्शन किया। मंच संचालन डॉ. मानसी द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ सलाहकार गौरी बसु, कार्यक्रम अधिशासी कमलेश कुमार पाठक समेत हजारों दर्शक मौजूद रहे।