सामाजिक भेदभाव से चिंतित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुरीतियों को दूर भगाने के लिए व्यापक अभियान चलाने जा रहा है। मंदिर, जल, दाह संस्कार का अधिकार सभी के लिए हो, इसका मूल मंत्र होगा। इसके लिए बस्तियों तथा उपेक्षित लोगों के बीच जाकर सेवा कार्यों को विस्तार देने की भी योजना बनाई गई है।
गौहनिया स्थित एक स्कूल में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में तीसरे दिन मंगलवार को सामाजिक समरसता पर मंथन हुआ। अनुसूचित जाति पर बढ़ते उत्पीड़न की शिकायतों के परिपेक्ष में सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा था, ‘मंदिर, जल, दाह संस्कार’ सभी के लिए समान होना चाहिए।
हमें इस बात के लिए लड़ना बंद करना होगा कि कौन शादियों में घुड़सवारी करेगा और कौन नहीं।’ उन्हांेने कहा था, भारतीय संविधान राजनीतिक और आर्थिक समानता पर केंद्रित है लेकिन सामाजिक समानता के बिना, वास्तविक और स्थिर परिवर्तन संभव नहीं है।
बैठक में सरसंघ चालक के इस बयान तथा इसके निहितार्थ पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में बस्तियों तथा सामाजिक तौर पर उपेक्षित लोगों के बीच जाकर सेवा कार्यों को विस्तार दिए जाने पर चर्चा हुई। शिक्षा और स्वास्थ्य इनकी मूल समस्या है। ऐसे में सेवा कार्यों के माध्यम से इनसे जुड़ी गतिविधियों को गति देने की बात कही गई। संघ के पदाधिकारियों का यह भी कहना था कि दूसरे वर्ग के लोग हिंदुओं को बरगलाते हैं कि उनका कोई सम्मान नहीं है।