सत्यापन करने वाले कर्मचारियों के बयान में विरोधाभास
जेल से धान की बिक्री के चौंकाने वाले प्रकरण में किस स्तर से क्या गड़बड़ी हुई है, यह तो जांच से ही साफ होगा। लेकिन, क्रय केंद्र से लेकर उसका सत्यापन करने वालों तक के बयानों में भारी विरोधाभास है। खरीद केंद्र प्रभारी रजनीश त्रिपाठी का कहना है कि धान बिक्री के लिए आए ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन तहसील प्रशासन करता है। लेखपाल की सत्यापन आख्या देखकर ही खरीद की गई है। संबंधित लेखपाल जीतेंद्र कुमार का कहना है कि उन्होंने किसी कपिल मुनि करवरिया के नाम का सत्यापन नहीं किया। खरीद केंद्र में धान कैसे बिका, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
इनका कहना है
कपिल मुनि करवरिया का धान किसी दूसरे कपिल मुनि ने बेच दिया है। दोनों में किसी प्रकार का संबंध नहीं है। कोई व्यक्ति अपनी उपज बेचने के लिए सिर्फ उसी को अधिकृत कर सकता है, जिसका आपस में खून का रिश्ता हो। दूसरा व्यक्ति बिक्री नहीं कर सकता। प्रकरण की जांच कराने के बाद दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - सुधांशु शेखर, डिप्टी आरएमओ
इस बात की जानकारी नहीं है कि किसकी खतौनी पर किसने और कब धान बेचा है। इसके बारे में अभी कुछ नहीं कर सकती हूं। - नीलम करवरिया, पूर्व विधायक व कपिल मुनि के छोटे भाई की पत्नी
बिक्री के लिए नामित करने की है व्यवस्था
धान खरीद के लिए ऑनलाइन आवेदन के दौरान यदि किसी को धान बेचने में परेशानी हो रही है तो वह परिवारी सदस्य को नामित कर सकता है। डिप्टी आरएमओ ने बताया कि यह विकल्प बुजुर्ग, असहाय, घर से बाहर रहने वाले किसानों और नौकरी करने वालों के लिए है। नामित व्यक्ति से आवेदक को अपना रिश्ता और उसका आधार नंबर बताना जरूरी है। भुगतान किसान के खाते में ही जाएगा।
जवाहर यादव की हत्या में कपिल मुनि को हुई है उम्रकैद
प्रयागराज के सिविल लाइंस में 13 अगस्त 1996 को सपा के पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या हुई थी। इसमें कपिल मुनि करवरिया को जेल भेजा गया था। कपिल मुनि 2009 में फूलपुर से बसपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। मूलत: कौशाम्बी जिले के सदर कोतवाली अंतर्गत चक थांबा गांव निवासी कपिल मुनि व उसका भाई पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, एमएलसी सूरजभान करवरिया मौजूदा वक्त नैनी सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।