बता दें कि 15 अप्रैल की रात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की कॉल्विन अस्पताल के गेट गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तीन शूटरों ने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को महज 18 सेकेंड के भीतर मौत की नींद सुला दिया था। शूटरों ने दोनों के पुलिस जीप से उतरने के 32वें सेकेंड में पहली गोली दागी थी। इसके बाद लगातार कुल 20 गोलियां दागीं और 50वें सेकेंड तक माफिया भाइयों का काम तमाम हो चुका था। अतीक व अशरफ को रात 10.36 पर लेकर पुलिस कॉल्विन अस्पताल के गेट पर पहुंची थी।
10.37 मिनट और 12 सेकेंड पर दोनों पुलिस जीप से नीचे उतर चुके थे। इसके बाद पुलिस उन्हें लेकर अस्पताल के भीतर जाने लगी। ठीक 32वें सेकेंड यानी 10.37 मिनट और 44 सेकेंड पर शूटरों ने पहली गोली दागी थी। इसके बाद ताबड़तोड़ 20 राउंड फायर अतीक और अशरफ को निशाना बनाकर किए गए थे। 18 सेकेंड में वारदात को अंजाम देकर शूटर अपने मकसद में कामयाब हो चुके थे। 10.38 मिनट और 02 सेकेंड पर अतीक और अशरफ दोनों लहूलुहान होकर जमीन पर लुढ़के पड़े थे और उनके शरीर बेजान हो चुके थे।
ये हुआ था 15 अप्रैल की रात
15 अप्रैल की रात लगभग साढ़े दस बजे अतीक और अशरफ को जब रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए कॉल्विन अस्पताल ले जाया जा रहा था। तभी मीडियाकर्मी बनकर दो बदमाश बाइक से आए और ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी थी। इस दौरान अतीक से रिपोर्टर पूछ रहा था कि वो असद के जनाजे में क्यों नहीं गया तो अतीक ने जवाब दिया था कि उसे नहीं ले गए तो वह नहीं गया।
इसके बाद अशरफ कहता है कि 'मेन बात है गुड्डू मुस्लिम' और गोलियां चलने लगती हैं। गोलियां लगने से अतीक व अशरफ ललूलुहान होकर वहीं गिर पड़े थे। दोनों को आनन-फानन स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और उस समय मौके से दो पिस्टल व छह खोखे मिले थे।