इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों की लिस्टिंग की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। जमानत अर्जी की तारीखें जहां जल्दी लग रही हैं, वहीं अन्य मुकदमे एक सप्ताह से एक माह बाद सूचीबद्ध हो रहे हैं। इससे अधिवक्ता और वादकारियों को परेशानी हो रही है।
मुकदमों की लिस्टिंग के लिए लगभग एक माह पहले नई व्यवस्था सीसीएमस (कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम) शुरू की गई थी। लेकिन, यह व्यवस्था अभी सुचारू रूप से कार्य नहीं कर रही है। मुकदमों की लिस्टिंग में आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। इसके बाद भी 20 से 25 दिन में मुकदमे ही सूचीबद्ध हो पा रहे हैं। अधिवक्ता पवन कुमार पांडेय ने बताया कि चार जनवरी को क्रिमिनल रिट पिटीशन फाइल की गई थी। इसकी लिस्टिंग तीन फरवरी को हुई। उन्होंने बताया कि मुकदमों की लिस्टिंग देर से होने पर वादकारी परेशान हो रो हैं। बार-बार फोन कर जानकारी मांग रहे हैं। ऐसे में उन्हें समझाना बड़ा मुश्किल हो रहा है।
वहीं, अधिवक्ता आकाश पटेल बताते हैं कि जमानत अर्जी पर सुनवाई जल्दी हो जा रही है। बाकी मुकदमों में देरी हो रही है। अधिवक्ता सागर शुक्ला बताते हैं कि हेल्प डेस्क से काफी मदद मिल रही है। कई बार मुकदमे में वकील का नाम नहीं दिखाई पड़ता। बाद में हेल्पडेस्क पर शिकायत करने पर ठीक कर दिया जाता है। इसके बाद मुकदमे वकील का नाम दिखने लगता है। दारागंज निवासी मनोज सिंह का कहना है कि नए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली के जिम्मा संभालने के बाद हो लोगों को व्यवस्था पटरी पर आने की उम्मीद है।