इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हलफनामे में मामूली आपराधिक मामलों की जानकारी न दिए जाने मात्र से नौकरी नहीं देना अन्यायपूर्ण है। यह टिप्पणी कर न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय ने बलिया के पुलिस अधीक्षक के आदेश को रद्द कर आशीष कुमार राजभर की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने कहा कि आवेदक नियुक्ति के लिए योग्य है तो मामूली प्रकृति के अपराध के मामले की छुपाई गई जानकारी को नजर अंदाज किया जा सकता है। वह भी तब जब याची ने दूसरे हलफनामे में उक्त जानकारी का खुलासा कर दिया हो।
2015 में आशीष की पुलिस कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति हुई थी। जून 2018 में हलफनामा दाखिल कर कहा कि उस पर न कोई आपराधिक मामला दर्ज है और न ही लंबित है। इसके बाद एसपी को पता चला कि अप्रैल 2017 में आशीष पर एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। यह जानकारी उसने छुपाई है। याची ने दूसरा हलफनामा दायर कर कहा कि उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था, लेकिन आरोप पत्र में उसका नाम नहीं था।
जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश के बावजूद, एसपी बलिया ने याची के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि प्रारंभिक हलफनामे में आपराधिक मुकदमे की जानकारी छुपाई है। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद याचिका स्वीकार करते हुए एसपी के आदेश को रद्द कर दिया। सचिव, गृह विभाग (पुलिस अनुभाग), सचिव, यूपी पुलिस भर्ती, प्रोन्नति बोर्ड, एसपी (कार्मिक) उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय और एसपी बलिया को निर्देश दिया। यह सुनिश्चित करें कि 2015 में अधिसूचित भर्ती के अनुसरण में याची को कांस्टेबल के पद के लिए उचित नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। साथ ही याची को नियुक्ति के परिणामस्वरूप वेतन और अन्य भत्तों के साथ-साथ वरिष्ठता सहित सेवा लाभ दिया जाए।