राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को संगठनात्मक संरचना के साथ ही बदले वैश्विक परिवेश में संघ की अवधारणा पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने संघ को दुनिया के अनुपमेय संगठन बताया। कहा कि जिस तरह सागर और आकाश की दूसरी उपमा नहीं दी जा सकती, उसी तरह संघ की भी तुलना किसी भी संगठन या समूह से नहीं की जा सकती।
महात्मा गांधी मार्ग स्थित केपी इंटर कॉलेज में सुबह शाखा टोली संगम के बौद्धिक में सर कार्यवाह ने संघ के दर्शन को समझाया। सुबह 6:30 बजे इस संगम की शुरुआत संघ के घोष के साथ हुई। काली टोपी में करीब 32 सौ से अधिक स्वयं सेवकों ने कतारबद्ध होकर सरकार्यवाह क मौजूदगी में योग, व्यायाम, आसन का प्रदर्शन किया। इसके बाद अपने बौद्धिक में सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इस दौरान पूरी दुनिया में संघ को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
लोग जानना चाहते हैं कि आखिर संघ है क्या? कोई मंदिर बनाने वाला संगठन है या हिंदुओं को संगठित करने वाला या फिर आंदोलन करने वाला कोई समूह है। दुनिया ऐसे अनेक तर्कों को लेकर संघ के प्रति अलग-अलग परिकल्पनाएं कर रही है। सर कार्यवाह ने इन अटकलों का उदाहरण जैन धर्म के स्याद्वाद के सिद्धांत से दिया। उनका कहना था कि जैसे स्याद्वाद में हाथी के रूप को लेकर कभी सूंड़ से तो कभी उसके चौड़े मोटे पांव से आकलन किया जाता है, उसी तरह संघ को लेकर आकलन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे इस तरह की अटकलें लगाने और कल्पनाएं करने से संघ को नहीं जाना जा सकता।
होसबाले का कहना था कि जैसे राम-रावण युद्ध की तुलना किसी युद्ध से नहीं की जा सकती। आकाश या सागर की उपमा किसी और को नहीं दी जा सकती, उसी तरह संघ की भी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है। संघ को जानने के लिए शाखा में आना होगा। उन्होंने कहा कि संघ रूपी गंगा में डुबकी लगाए बिना इसके बारे में कुछ भी नहीं समझा जा सकता। उन्होंने संघ को एक साधना और समाज के लिए प्राण वायु बताया। सर कार्यवाह ने पंच प्रण के सिद्धांत को दोहराया। उन्होंने शाखा टोली संगम को भी साधना का क्रम बताया और इसके लिए दृढ़ता और संकल्प शक्ति के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।