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आईटी जीवन-आजीविका के क्षेत्र की प्रगति के केंद्र में : किरण देशपांडे

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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के 19वें दीक्षांत समारोह में शनिवार को 673 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। । इसके अलावा 22 मेधावियों को पदक और आठ को मेरिट प्रमाणपत्र दिए गए।
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मुख्य अतिथि टेक महिंद्रा के पूर्व सीईओ और मोजो नेटवर्क के सह-संस्थापक किरण देशपांडे ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत ने दुनिया को एक वैश्विक उद्योग दिया और इस क्षेत्र में अग्रणी भी है। आज जीवन और आजीविका के क्षेत्र में हुई प्रगति के केंद्र में आईटी है। चाहे वह आपका स्वास्थ्य हो या पैसे का प्रबंधन। यात्रा, मनोरंजन, खेल, पेशेवर लक्ष्य और व्यक्तिगत जरूरतें हो या कंप्यूटर।
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उन्हाेंने कहा कि स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के रूप में आप भाग्यशाली लोग हैं जो अनुसंधान, विकास और संगठनों के प्रबंधन के माध्यम से नए मोर्चे खोलेंगे।
आप में से कुछ उद्यमी भी बनेंगे। आपकी भूमिका महत्वपूर्ण और आधारभूत है, क्योंकि कंप्यूटिंग की यात्रा अभी आंशिक रूप से ही पूरी हुई है।
अब कंप्यूटर हमारे शरीर में विशेषज्ञ सेमीकंडक्टर चिप्स के रूप में प्रवेश कर सकते हैं। वह हमारी निगरानी और उपचार कर सकते हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग अभी शुरू ही हुई है। भविष्य में कैंसर, अल्जाइमर और कई अन्य बीमारियों के इलाज की समस्या का यह समाधान हो सकता है।
इसका सदुपयोग करने के लिए युवा कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ग्रहण करने के बाद हमारी समाज के प्रति जो जिम्मेदारी है, उसे भी निभाना होगा।


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हमारी कल्पना से आगे जाएगा भविष्य : सहस्रबुद्धे
विशिष्ट अतिथि नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (एनईटीएफ), एनबीए और ईसी नैक के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने वीडियो संदेश में कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में समाज की बेहतरी के लिए कई बदलाव किए गए हैं। इसका असर आने वाले वर्षों में दिखेगा। प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव हो रहा है, इसलिए भविष्य हमारी कल्पना से आगे जाएगा, लेकिन प्रदूषण, पारिस्थितिक असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के मामले में चुनौतियां भी पैदा हुई हैं।

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संचार प्रौद्योगिकी में अगुवाई कर रहा संस्थान : सुतावने
ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि हमारा संस्थान अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में एक नेता के रूप में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हम वायरलेस संचार, आईओटी, साइबर सुरक्षा और सिग्नल प्रोसेसिंग जैसे 5जी और 6जी क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध में शामिल हैं।संस्थान अपने मिशन से प्रेरित होकर, भारत और विदेशों में शिक्षाविदों, उद्योग, शोध संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और सामाजिक क्षेत्र के संचालकों के साथ सहयोग को प्राथमिकता पर रखता है।
पिछले वर्ष हमने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले विभिन्न संगठनों के साथ 15 समझौते किए हैं। हम आईटी, एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स, वीएलएसआई, 6जी, फिनटेक आदि के क्षेत्र में स्टार्टअप को सहायता देने के साथ-साथ तकनीकी दिग्गजों के साथ संबंधों को बनाए हुए हैं।
वहीं, आईआईआईटी ग्वालियर के निदेशक एसएन सिंह ने मेधावियों को सामाजिक दायित्वों को भी पूरा करने के लिए प्रेरित किया।

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निदेशक के हाथों मिली उपाधि तो खिल उठा चेहरा
समारोह में निदेशक के हाथों उपाधि मिली तो विद्यार्थियों का चेहरा खिल उठे। बीटेक-आईटी के 262, बीटेक इलेक्ट्रॉनिक संचार इंजीनियरिंग के 128, बीटेक बिजनेस इंफॉर्मेटिक्स के 42 छात्रों को स्नातक की डिग्री मिली। इसके अलावा एमटेक, एमबीए और अन्य शाखाओं सहित 195 स्नातकोत्तर उपाधियां दी गईं। एमटेक और पीएचडी में दोहरी डिग्री वाले 12, एमबीए और पीएचडी में दोहरी डिग्री वाले दो है। एमटेक बाइ रिसर्च में दो को और पीएचडी की डिग्री 30 को दी गई। इसमें 150 छात्राएं हैं।



झारखंड के इंदर सोनू को मिले तीन पदक
बीटेक-आईटी के छात्र इंदर सोनू को संस्थान स्वर्ण पदक के अलावा समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए चेयरमैन स्वर्ण पदक और एंडोमेंट पदक प्रदान किया गया। वहीं, काजल कौशल को संस्थान रजत समेत दो पदक मिले। दिव्य अग्रवाल को संस्थान कांस्य पदक दिया गया।
बीटेक-ईसीई के लिए स्वर्ण पदक विशेष मित्तल को, रजत मोहित गर्ग को और कांस्य पदक कार्तिक गुप्ता को दिया गया। बीटेक-ईसीई के लिए संस्थान स्वर्ण पदक तरुण सिंह को, रजत शुभी पांडेय को और कांस्य सुप्रिया पाटीदार को प्रदान किया गया।
एमबीए में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर मान्यता हरिशंकर यादव को स्वर्ण, दीपाली पाहूजा को रजत और स्मृति त्रिपाठी को कांस्य पदक दिया गया।
एमटेक-आईटी के लिए मोहम्मद फैज अंसारी को स्वर्ण, हर्ष को रजत और दीपांकर कर्माकर को कांस्य पदक मिला। एमटेक-ईसीई श्रेणी में स्वप्निल दुबे को स्वर्ण, दीप श्रेया को रजत और मुदित गुप्ता को कांस्य मिला।
इसके अलावा काजल कौशल, जोशी ख्याति महेश, मेधा तिवारी, अंजलि साहू और तरुण सिंह को एंडोमेंट पदक मिला।

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मेधावियों से बातचीत
आईएएस बनने का सपना
डाॅल्टनगंज, पलामू (झारखंड) निवासी बीटेक-आईटी के छात्र इंदर सोनू को तीन पदक मिले हैं। यहां पढ़ाई पूरी करते ही उन्हें 34 लाख वार्षिक पैकेज पर बंगलूरू के मिसो कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन उनका सपना आईएएस बनने का है। पिता विनोद कुमार गुप्ता गांव में इंटर कॉलेज चलाते हैं जबकि और मां रेणु कॉलेज की प्रधानाचार्य हैं।
45 लाख पैकेज की मिली नौकरी
दो पदक पाने वाली अहमदगढ़, पंजाब की काजल कौशल को बंगलूरू में गूगल कंपनी में 45 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज की नाैकरी मिली है। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम करना चाहती है। मां अंजना देवी पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड में सर्कल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं।
सफल व्यापारी बनने की चाहत
जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर निवासी मान्यता हरिशंकर यादव ने एमबीए गोल्ड मेडल हासिल किया है। पिता हरिशंकर यादव हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं, जबकि मां मीरा यादव गृहिणी हैं। यहां से पढ़ाई करते के बाद उन्हें गुरुग्राम की जैनपॉक्ट में सीनियर एसोसिएट की जाॅब मिल गई है। वह सफल व्यापारी बनना चाहती हैं।
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