पुलिस सर्विलांस व अन्य माध्यमों से नंबर पता करने में जुटी है, लेकिन अब तक कामयाबी हाथ नहीं लगी है। फ्लैट की भी कई बार में तलाशी ली जा चुकी है, लेकिन अब तक सिम नहीं मिला है। गौरतलब है कि घटनास्थल से पुलिस को एक कीपैड मोबाइल हैंडसेट मिला था, लेकिन इसमें से सिम गायब था और कॉल हिस्ट्री भी डिलीट की जा चुकी थी। सूत्रों का कहना है कि नंबर की जानकारी होने पर ही सीडीआर निकलवाई जा सकेगी और तब पता चलेगा कि आखिरी बार मृतका के संपर्क में कौन आया था। सीओ सत्येंद्र प्रसाद तिवारी का कहना है कि फिलहाल मृतका के मोबाइल नंबर का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सर्जन का एक और बयान सवालों के घेरे में
फिलहाल मृतका के मोबाइल नंबर की जानकारी न होने के सर्जन के बयान को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब महिला सर्जन के संपर्क में पिछले सात-आठ सालों से थी, तो आखिर कैसे उसका मोबाइल नंबर उनके पास नहीं था। एक सवाल यह भी है कि पुलिस ने अब तक सर्जन की सीडीआर क्यों नहीं खंगाली। जानकारों का कहना है कि सर्जन की जरूर मृतका से फोन पर बात होती रही होगी। ऐसे में उनके नंबर की सीडीआर की गहराई से पड़ताल होती, तो पुलिस को कोई न कोई क्लू जरूर मिलता। सवाल यह भी है कि शुरू से ही मामले में जानकारी छुपाने में लगे सर्जन के इस बयान पर पुलिस ने भरोसा कैसे कर लिया।
सिविल लाइंस में भी रह चुकी थी महिला
उधर मृतका को लेकर एक और चर्चा है। इसके मुताबिक वह रामबाग स्थित फ्लैट से पहले सिविल लाइंस में किराये पर रह चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पत्रिका चौराहे के पास स्थित मकान में वह किराये पर रहती थी। जिसके मकान के बाहर अक्सर एक नीले रंग की वैगनआर कार खड़ी रहती थी। कहा यह भी जा रहा है कि यह कार डॉक्टर की ही थी। यहां कुछ दिनों तक रहने के बाद ही महिला फ्लैट में रहने पहुंची थी। हालांकि फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस भी इस बारे में अनभिज्ञता जता रही है।
फ्लैट को लेकर तो नहीं था विवाद?
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि पिछले दो महीने से सर्जन ने फ्लैट पर आना जाना कम कर दिया था। आशंका है कि मृतका से किसी बात को लेकर विवाद के चलते ऐसा हुआ। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच में जुटी है कि मृतका व डॉक्टर के बीच विवाद का क्या कारण हो सकता है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं बेशकीमती फ्लैट को लेकर मृतका व डॉक्टर के बीच कोई विवाद तो नहीं था।
दरअसल सर्जन ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि यह फ्लैट उन्होंने अपने नाम लिया है। दरअसल सूत्रों का कहना है कि प्रीतमनगर में करोड़ों रुपये का एक एलआईजी व ईडब्ल्यूएस मकान और जार्जटाउन में पुश्तैनी हवेली होने के बावजूद सर्जन ने रामबाग में यह फ्लैट खरीदा था। एक और खास बात यह कि मृतका जब से इस फ्लैट में आई, वह कभी इसे छोड़कर कहीं नहीं गई। बहुत कम ही वह फ्लैट सूना छोड़कर जाती थी। शुरुआती कुछ सालों में तो उसका बाहर निकलना होता भी था, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह एकदम न के बराबर हो गया था।