लॉकडाउन में भी अकादमिक गतिविधियों पर बढ़ा खर्च ० पिछले साल की तुलना में इस बार अप्रैल से जून तक आधे से कम हो गया बिजली का बिल ० प्रशासनिक गतिविधियों पर भी बढ़ा खर्च, इविवि प्रशासन ने यूजीसी को भेजा खर्च का ब्यौरा प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) का बिजली बिल लॉकडाउन में आधे से भी कम हो गया। जबकि पिछले साल की तुलना में इसी दौरान अकादमिक गतिविधियों पर कई गुना अधिक धनराशि खर्च हो गई है। लॉकडाउन के दौरान प्रयोगशालाओं का संचालन भी लगभग ठप रहा, सो इस मद में भी पिछले वर्ष की तुलना में बहुत कम खर्च हुआ है। इविवि प्रशासन ने यूजीसी को भेजे गए बजट के प्रस्ताव के साथ इस साल अप्रैल से जून तक हुए खर्च का ब्यौरा भी प्रेषित किया है। इविवि प्रशासन ने पिछले साल अप्रैल से जून तक बिजली के बिल पर तीन करोड़ ४८ लाख ७६ हजार रुपये खर्च किए थे, जबकि इस बार अप्रैल से जून तक बिजली पर एक करोड़ ५२ लाख ६१ हजार रुपये ही खर्च हुए। यानी पिछली साल की तुलना में इस बार बिजली पर आधे से भी कम धनराशि खर्च हुई। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान इविवि में सभी कक्षाओं का संचालन ठप रहा। कुलपति, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक जैसे कुछ अफसरों के कार्यालयों को छोडक़र विभागाध्यक्ष, डीन, सेंटर हेड आदि के कार्यालय भी इस दौरान ज्यादातर समय बंद रहे और वहां बिजली का उपयोग नहीं हुआ। ऐसे में इस वर्ष बिजली के बिल पर इविवि प्रशासन का खर्च काफी घट गया। वहीं, अन्य अकादमिक गतिविधियों में खर्च कई गुना बढ़ गया। पिछले साल अप्रैल से जून तक अन्य अकादमिक गतिविधियों पर १० लाख २५ हजार रुपये खर्च हुए थे, जबकि इस बार अप्रैल से जून तक एक करोड़ ७८ लाख ४८ हजार रुपये खर्च कर दिए गए। हालांकि लॉकडाउन के कारण अकादमिक गतिविधियां लगभग ठप रहीं और केवल ऑनलाइन पढ़ाई हुई। इसके बावजूद खर्च कई गुना बढ़ गया। लॉकडाउन में इविवि की प्रयोगशालाएं भी बंद रहीं, सो इन पर होने वाला खर्च भी कम हो गया। पिछले साल अप्रैल से जून तक ११ लाख ४६ हजार रुपये खर्च किए गए थे, जबकि इस बार केवल एक लाख २० हजार रुपये ही खर्च हुए। पिछले साल के मुकाबले इस बार लॉकडाउन के दौरान प्रशासिनक गतिविधियों पर खर्च बढ़ा है। पिछले साल इस मद में अप्रैल से जून तक एक करोड़ ९३ लाख ४९ हजार रुपये खर्च किए गए थे, जबकि इस बार लॉकडाउन में प्रशासनिक गतिविधियों पर तीन करोड़ ८९ लाख ८६ हजार रुपये खर्च कर दिए गए। इसके विपरीत अन्य गतिविधियों (यूजीसी नॉन-नेट फेलोशिप) पर भी लॉकडाउन में खर्च कुछ कम हुआ है। पिछली बार अप्रैल से जून तक एक करोड़ छह लाख ७५ हजार रुपये खर्च किए गए थे और इस बार यानी वर्ष २०२०-२१ में अप्रैल से जून तक ९४ लाख रुपये खर्य हुए। ०० टीए/डीए पर एक रुपया भी नहीं हुआ खर्च - लॉकडाउन के दौरान इविवि प्रशासन ने टीए/डीए पर इस साल अप्रैल से जून तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया, जबकि पिछले साल इसी दौरान चार लाख ८२ हजार रुपये खर्च कर दिए थे। गौरतलब है कि जून में गर्मी की छुट्टी होती है और सीएजी की टीम ने वर्ष २०१२ से २०१७ लगातार छह वर्षों तक शिक्षकों को दिए गए टीए यानी परिवहन भत्ते के भुगतान पर ऑडिट आपत्ति भी लगा रखी है। इस मामले में इविवि प्रशासन ने शिक्षकों से अंडरटेकिंग मांगी है।