नाबालिग लड़की का अपहरण करने के आरोपित को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन वर्ष की कैद और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश निशा झा ने सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मृत्युंजय त्रिपाठी और आरोपित अजीत वर्मा के तर्कों को सुनकर एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया।
रामकुमार ने जॉर्ज टाउन थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया था कि उसकी 17 वर्षीय पोती 11 अप्रैल 2008 को शाम सात बजे सब्जी लेने निकली थी, जो वापस नहीं लौटी। उसकी गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 27 अप्रैल 2008 को उसको उसके बेटे के मित्र महेंद्र ने जानकारी दी कि 11 अप्रैल 2008 को जब जंक्शन स्टेशन पर वह हमीरपुर जा रहा था तो उनकी पोती मिली थी।
उसने बताया कि वह फैजाबाद जा रही थी और साथ में एक रिश्तेदार होने की भी जानकारी दी थी। पोती ने जिसे रिश्तेदार बताया उसका हुलिया अजीत वर्मा से मिलता था। इस संदेह पर अजीत वर्मा को उसके पिता के साथ बुलाया गया और उसे थाने ले जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने विवेचना की और आरोप पत्र प्रस्तुत किया।