इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति-पत्नी बन चुके आरोपी और दुष्कर्म पीड़िता के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरोपी पर मुकदमा जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो एक खुशहाल परिवार टूट जाएगा। यह टिप्पणी करते हुए राजीव मिश्रा की पीठ ने सोनभद्र के आरोपी युवक पर चल रहे मुकदमे को रद्द कर दिया।
सोनभद्र के रायपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने याची पर दुष्कर्म, पॉक्सो व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि स्कूल जाते समय पीड़िता का अपहरण किया और दुष्कर्म किया। साथ ही जान से मारने की धमकी दी। वर्ष 2023 में पुलिस ने इस मामले में न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता ने आरोपी के साथ 17 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शादी कर लिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से विवाह प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है। शादी के बाद पक्षों ने 23 अक्तूबर 2024 को ट्रायल कोर्ट में एक समझौता पत्र प्रस्तुत कर मुकदमे को रद्द करने की मांग की।
न्यायालय ने पाया कि पीड़िता के वकील ने मुकदमे को रद्द करने की अर्जी का विरोध नहीं किया। पीड़िता अब आरोपी युवक की कानूनी रूप से पत्नी है और उसके साथ रह रही है। न्यायालय ने आरोपी की अर्जी को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट की अदालत में लंबित मामले को रद्द करने का आदेश दिया।