दालमंडी में कार्रवाई। सांकेतिक चित्र
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद मकान गिराने के मामले में तीन अधिकारियों ने शपथपत्र देकर मकान गिराने से इन्कार किया है। एक अधिकारी ने 11 जून 2026 को पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहने की बात स्वीकार की है। इस पर न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने सवाल उठाया कि जब किसी अधिकारी ने मकान नहीं गिराया तो फिर तोड़फोड़ किसने की? अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
याची जावेद आलम का दालमंडी में मकान है। नगर निगम ने मकान को जर्जर घोषित कर 15 अप्रैल 2026 को नोटिस जारी किया था, जिसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस पर कोर्ट ने सात मई 2026 के आदेश से एक नई जांच समिति गठित करने का आदेश दिया था। समिति को भवन का निरीक्षण कर नगर आयुक्त को रिपोर्ट देनी थी। इसके बाद निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर नया नोटिस जारी कर याची को दो सप्ताह में अपनी आपत्ति दाखिल करने का अवसर देना था।
नगर आयुक्त को आपत्ति पर निर्णय लेना था। तब तक दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद याची के मकान को गिरा दिया गया। इस पर याची ने अवमानना याचिका दायर की। आरोप था कि उसकी आपत्ति पर निर्णय लिए बिना 11 जून को मकान गिरा दिया गया। शपथपत्रों को पढ़ने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सभी अधिकारी मकान गिराने से इन्कार कर रहे हैं। कोर्ट ने इस स्थिति को विरोधाभासी और हैरान करने वाला माना। याचिकाकर्ता को तीनों अधिकारियों के शपथपत्रों पर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
नगर आयुक्त बोले, कोई कार्रवाई नहीं की : नगर आयुक्त ने शपथपत्र दाखिल कर कहा कि उनकी ओर से मकान गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दूसरे अधिकारी ने कहा, दालमंडी मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान वह मौजूद थे: दूसरे अधिकारी ने अपने शपथपत्र में कहा कि 11 जून को लोक निर्माण विभाग ने दालमंडी मार्ग के चौड़ीकरण के लिए कार्रवाई की थी। वह केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद थे।
तीसरे अधिकारी का हलफनामा...मकान जर्जर था, अपने आप गिरा: तीसरे अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने बेचे गए भवन के हिस्सों को सड़क निर्माण के लिए हटाया था। याची के स्वामित्व वाले हिस्से को नहीं गिराया गया। वह पहले से जर्जर था और अपने आप गिर गया।