प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे में बनाए जा रहे राजभाषा पखवाड़े के तहत बृहस्पतिवार को हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर एनसीआर के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा ने कहा कि हिंदी हमेशा ही गतिशील एवं ग्रहणशील भाषा रही है। हिंदी और उर्दू के मेल से ही हिंदुस्तानी कहा जाता है। भारत के संविधान में हिंदी को देश की सामासिक संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने की परिकल्पना की गई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी यही सपना था। कार्यक्रम में उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक यूटीएस प्रवीण कुमार, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी चंद्र भूषण पांडेय, यथार्थ पांडेय आदि मौजूद रहे।