इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खोने के आधार पर चेक अनादरण की आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इन्कार कर दिया। कहा कि विवादित चेक ही खोई हुई चेक है, यह तथ्य का प्रश्न है। इसे हल करने का क्षेत्राधिकार ट्रायल कोर्ट के पास है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की अदालत ने प्रगति कपूर की ओर से गाजियाबाद के ट्रायल कोर्ट से जारी समन के साथ चल रही संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए दिया है। मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद का है। सनी रैना ने याची के खिलाफ एन आई एक्ट के तहत जिला अदालत गाजियाबाद में परिवाद दाखिल किया है।
कोर्ट ने याची के खिलाफ समन जारी कर बतौर आरोपी तलब किया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी कि याची की चेकबुक खो गई थी। इसकी सूचना मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई गई है। विपक्षी ने खोई चेकबुक की चेक का दुरुपयोग किया है। लिहाजा, समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया। कहा कि यह सही है कि याची ने चेकबुक की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई है। लेकिन, उसमें विशिष्ट रूप से विवादित चेक का विवरण अंकित नहीं है। इससे यह कहना कि विवादित चेक खोई चेकबुक का हिस्सा है, यह विश्वसनीय नहीं है। याची ने चेक में किए हस्ताक्षर को स्वीकार किया है।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कहा कि विवादित चेक याची की खोई चेक ही है, यह तथ्य का प्रश्न है। इसको बिना ट्रायल के तय किया जा सकता। पुलिस को चेकबुक की गुमशुदगी की दी गई सूचना भी अस्पष्ट है। लिहाजा, ट्रायल कोर्ट की ओर से याची के खिलाफ जारी समन आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है।