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High Court : दागी हाथों से अदालत का दरवाजा खटखटाने वाला रहम का हकदार नहीं, याची पर 50 हजार का हर्जाना लगाया

Sun, 08 Mar 2026 12:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी रसीद पेश कर बैंक के कर्ज से माफी की मांग करने वाले याची पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि दागी हाथों से अदालत का दरवाजा खटखटाने वाला रहम का हकदार नहीं हो सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी रसीद पेश कर बैंक के कर्ज से माफी की मांग करने वाले याची पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि दागी हाथों से अदालत का दरवाजा खटखटाने वाला रहम का हकदार नहीं हो सकता।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने बुलंदशहर निवासी दिनेश कुमार की याचिका खारिज करते हुए की। मामले के मुताबिक याची ने मोतीबाग स्थित जिला सहकारी बैंक से कर्ज लिया था। बैंक ने 7.22 लाख रुपये की वसूली के लिए नोटिस भेजा तो याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दावा किया कि उन्होंने 7.50 लाख रुपये नकद जमा कर दिए हैं। सबूत के तौर पर उन्होंने बैंक की मुहर और कैशियर के हस्ताक्षर वाली रसीद भी पेश की।

हालांकि, बैंक के वकील ने दस्तावेज पेश किए तो सच्चाई जानकर अदालत हैरान रह गई। बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि उस दिन कोई बड़ी रकम जमा ही नहीं हुई थी। उल्टा, याची ने उसी दिन तहसील में हलफनामा देकर रुपये जमा करने के लिए बैंक से 15 दिन की मोहलत मांगी थी। यानी एक तरफ वह समय मांग रहा था और दूसरी तरफ कोर्ट में फर्जी रसीद दिखाकर कर्ज चुकाने का दावा कर रहा था।

इस आचरण से खफा अदालत ने याची पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए रकम 10 मार्च तक हाईकोर्ट के महानिबंधक कार्यालय में जमा करने का आदेश दिया। यह भी स्पष्ट किया कि तय समय पर जुर्माना नहीं भरने पर डीएम याची से इस रकम को भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह कड़ी कार्रवाई कर वसूल करेंगे। संवाद

ऐसे वादी न केवल अदालत का कीमती समय बर्बाद करते हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। इस तरह की प्रवृत्तियों को बिना दंड के छोड़ा नहीं जा सकता। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

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