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High Court : हिन्दू विवाह की वैधता का आधार धार्मिक अनुष्ठान, प्रमाण पत्र नहीं, परिवार न्यायालय का आदेश रद्द

Sat, 30 Aug 2025 03:56 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह की वैधता का आधार धार्मिक अनुष्ठान है, विवाह प्रमाण पत्र नहीं। लिहाजा, पंजीकरण प्रमाण पत्र के अभाव में हिंदू विवाह को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह की वैधता का आधार धार्मिक अनुष्ठान है, विवाह प्रमाण पत्र नहीं। लिहाजा, पंजीकरण प्रमाण पत्र के अभाव में हिंदू विवाह को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की अदालत ने विवाह प्रमाण पत्र के आभाव में विवाह की वैधता को स्वीकार करने से इन्कार करने वाले आजमगढ़ की परिवारिक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया।

मामला आजमगढ़ परिवार अदालत से जुड़ा है। सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल करने पर अदालत ने दंपती से विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र पेश करने को कहा था। पति-पत्नी ने तर्क दिया कि उनका विवाह 2010 में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था, लेकिन विवाह का पंजीकरण नहीं कराया गया। परिवार न्यायालय ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी।

इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली। कहा कि प्रक्रिया संबंधी नियम न्याय दिलाने के साधन होते हैं, न कि बाधा। तकनीकी आधार पर वैध विवाह को संदेह के घेरे में नहीं डाला जा सकता। लिहाजा, परिवार न्यायालय तलाक की अर्जी को गुण-दोष के आधार पर शीघ्र निपटाए।

तलाक के लिए विवाह प्रमाण पत्र जरूरी नहीं

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत आपसी सहमति से तलाक की कार्यवाही के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह पंजीकरण केवल साक्ष्य का साधन है, विवाह की वैधता का आधार नहीं।

कोर्ट की टिप्पणी

उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 लागू होने के बाद पंजीकरण जरूर अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उससे पहले हुए विवाह अवैध हो जाएंगे। ऐसे मामलों में बिना प्रमाणपत्र भी तलाक की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है -  इलाहाबाद हाईकोर्ट

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