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High Court : निशाना कोई और, मौत किसी और की, फिर भी लगेगा हत्या का केस

Wed, 22 Apr 2026 11:01 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति की हत्या के इरादे से वार करता है और उस वार से किसी अन्य निर्दोष की मृत्यु हो जाती है, तब भी अपराधी हत्या का दोषी माना जाएगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति की हत्या के इरादे से वार करता है और उस वार से किसी अन्य निर्दोष की मृत्यु हो जाती है, तब भी अपराधी हत्या का दोषी माना जाएगा। इरादे का स्थानांतरण हो जाने के बाद भी अपराधी यह कहकर नहीं बच सकता कि उसका उद्देश्य मृतक को मारना नहीं था।

यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने संभल जिले के शाकिर हत्याकांड में सजा काट रहे अभियुक्त रिजवान की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है।

वर्ष 2019 में अपीलकर्ता रिजवान ने बनियाढेर थाना क्षेत्र में एक दुकानदार से जबरन रुपयों की मांग की थी। दुकानदार ने रुपये देने से इन्कार किया तो रिजवान ने उस पर जान से मारने की नीयत से गोली चलाई जो दुकानदार को न लगकर पास ही काम कर रहे मजदूर शाकिर को लगी और उसकी मौत हो गई।

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में रिजवान को धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। अभियुक्त ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर कर जमानत की मांग की थी। अपीलकर्ता के वकील ने दलील दी कि रिजवान का मकसद शाकिर की हत्या करना नहीं था, इसलिए उस पर धारा 302 के बजाय गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) का मामला चलना चाहिए।

हालांकि, खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नन्हे बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए हालिया निर्णय का हवाला देते हुए इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने अभियुक्त के आचरण और उसके लंबे आपराधिक इतिहास का संज्ञान लिया।

सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि रिजवान के विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट और डकैती जैसे कुल 27 आपराधिक मामले दर्ज हैं। गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति और स्थानांतरित दुर्भावना के सिद्धांत को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिजवान की जमानत और सजा के स्थगन की अर्जी को नामंजूर कर दिया।
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