इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लंबित जांच के दौरान किसी भी कर्मचारी को निलंबित करना न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ व मनमाना रवैया है। कोर्ट ने यह टिप्पणी कर मेरठ के विद्युत नगरीय वितरण उपखंड गंगानगर के एसडीओ के निलंबन पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही नियमित वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने एसडीओ दिनेश कुमार मौर्य की याचिका पर दिया। याची का कहना था कि वह सब-स्टेशन से अनुपस्थित था। इससे जला ट्रांसफॉर्मर बदलने में देरी हुई और जून 2024 में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के आदेश से उसे निलंबित कर दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याची के अधिवक्ता प्राणेश कुमार मिश्रा ने दलील दी कि ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद आपूर्ति बस कपलर के माध्यम से सुनिश्चित कर दी गई थी। प्राइवेट फर्म की ओर से ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध होते ही उसे लगा दिया गया था। बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई।
न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप लापरवाही का है। यह इतना गंभीर मामला नहीं है कि बड़ी कार्रवाई कर कर्मचारी को निलंबित कर दिया जाए। न्यायालय ने निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को सूचित करने का निर्देश दिया।