इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विक्रय राशि का पूरा भुगतान न होने के आधार पर निष्पादित विक्रय विलेख (सेल डीड) को अवैध नहीं ठहराया जा सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने मथुरा की गुंजन अग्रवाल की अपील खारिज कर दी।
गुंजन ने अपनी संपत्ति 32.50 लाख रुपये में आशीष गौतम को 30 नवंबर 2022 को बेची और पंजीकृत विक्रय विलेख भी निष्पादित किया। आरोप है कि उन्हें केवल 20,000 नकद मिले और शेष 32.30 लाख रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से होना था, जो बाद में बैंक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इस पर उन्होंने सिविल कोर्ट में वाद दायर किया। उनकी मांग थी कि खरीदार को संपत्ति में हस्तक्षेप करने से रोका जाए। साथ ही विक्रय विलेख भी रद्द किया जाए।
इस पर खरीदार ने लंबित वाद में एक आवेदन दायर कर कहा कि पूरी रकम का भुगतान न करने के आधार पर विक्रय विलेख को रद्द नहीं किया जा सकता। ट्रायल कोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को खरीदार के आवेदन को स्वीकार कर लिया। इस फैसले के खिलाफ गुंजन ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
कोर्ट ने कहा कि भले ही पूरे मूल्य का भुगतान न किया गया हो पर दस्तावेज निष्पादित और पंजीकृत होने के बाद बिक्री पूरी हो जाती है। अपूर्ण भुगतान बिक्री को अमान्य नहीं करता है। विक्रेता को बकाया वसूली के लिए वाद दायर करना चाहिए। कोर्ट ने अपील खारिज कर ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा।