इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति से लंबे समय तक अलग रहना, संबंध न बनाना व विवाह को बचाने के लिए कोई कानूनी प्रयास न करना क्रूरता है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने पारिवारिक न्यायालय गाजीपुर के तलाक अर्जी को खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। पति की तलाक अर्जी स्वीकार कर ली। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह व न्यायमूर्ति डी. रमेश की खंडपीठ ने महेंद्र प्रसाद की याचिका पर दिया।
गाजीपुर निवासी महेंद्र प्रसाद की शादी 26 फरवरी 1990 को हुआ था। कुछ विवाद के पति-पत्नी अलग-अलग रहने लगे। इसके बाद पति ने पारिवारिक न्यायालय में तलाक अर्जी दाखिल कर दी। न्यायालय ने तलाक अर्जी को रद्द कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।