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हाईकोर्ट ने कहा : वैध दस्तावेज से ही की संपत्ति वक्फ की हो सकती है, जुबानी घोषणा से नहीं

Thu, 15 May 2025 05:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैध दस्तावेज से ही की संपत्ति वक्फ की हो सकती है, जुबानी घोषणा से नहीं। हाईवे निर्माण जैसे सार्वजनिक हित के लिए अवैध निर्माणों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
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हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैध दस्तावेज से ही की संपत्ति वक्फ की हो सकती है, जुबानी घोषणा से नहीं। हाईवे निर्माण जैसे सार्वजनिक हित के लिए अवैध निर्माणों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। भले ही वह धार्मिक या शिक्षण संस्थानों से जुड़े हों। उनके साथ आस्था का जुड़ाव हो। लेकिन विधिक प्रक्रिया में दस्तावेजों की अहमियत सर्वोपरि है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने सहारनपुर के मदरसा कासिमुल उलूम की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी।

याची मदरसे का दावा है कि पूर्व सूचना के बिना प्रशासन मदरसे की जमीन पर बनी पुलिस चौकी गिरा रहा है। वह संपत्ति वक्फ की है। इस पर बनी मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती है। साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन होता है। लिहाजा, प्रशासन की ओर से प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकी जाएं।

वहीं राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि विवादित भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग-73 के विस्तार में शामिल है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के आदेशों के मुताबिक, सभी अनधिकृत निर्माणों को हटाया जाना अनिवार्य है। प्रश्नगत पुलिस चौकी अवैध है। मदरसा वक्फ बोर्ड में पंजीकृत नहीं है। न ही उनके पास प्रश्नगत भूमि के स्वामित्व का कोई पुख्ता दस्तावेज उपलब्ध है। लिहाजा, अवैध निर्माण को हटाया जाना गैर कानूनी नहीं है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

केवल मौखिक दावे के आधार पर किसी संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं माना जा सकता। जब तक वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाना न्यायोचित नहीं

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