इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी के ड्राइवर नियाज अंसारी की रासुका निरूद्धि को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही कहा कि अन्य केस में बंद नहीं हैं तो रिहा किया जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने नियाज अंसारी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याची के खिलाफ चित्रकूट जेल में बंद अब्बास अंसारी से जेल में अवैध रूप से मिलने और उसे जेल से भगाने के प्रयास करने के आरोप में रासुका में निरुद्ध किया गया था। आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में था। जब उसने जमानत के लिए अर्जी दाखिल की तो डीएम चित्रकूट ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई करते हुए निरूद्धि आदेश पारित किया।
कहा गया कि याची को हिरासत में रखने के लिए उसे कोई कानूनी सहायता नहीं मिली। याची ने जेलर के माध्यम से सलाहकार कमेटी के समक्ष अभ्यावेदन भिजवाया लेकिन वह कमेटी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ। याची की हिरासत अवधि को भी गलत तरीके से बढ़ाया गया। कोर्ट ने कहा निरूद्धि के लिए रासुका कानून के उपबंधो का पालन नहीं किया गया। सरकार ने एडवाइजरी बोर्ड की रिपोर्ट पर विवेक इस्तेमाल कर फैसला नहीं लिया।