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High Court: जमानत रद्द करने का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना व अभियुक्त को सबूतों से छेड़छाड़ करने से रोकना है

Wed, 07 May 2025 01:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करने का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना और अभियुक्त को सबूतों से छेड़छाड़ करने से रोकना है। कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करना एक गंभीर मामला है और इसे सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करने का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना और अभियुक्त को सबूतों से छेड़छाड़ करने से रोकना है। कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करना एक गंभीर मामला है और इसे सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करे तो जमानत रद्द की जा सकती है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने अश्वनी कुमार अग्रवाल की ओर से दाखिल जमानत रद्दीकरण अर्जी को स्वीकार करते हुए की। साथ ही ट्रायल कोर्ट से जमानत पाए आरोपी राकेश शर्मा की जमानत को रद्द कर दिया।

मामले के तथ्यों के अनुसार अश्विनी कुमार अग्रवाल को राकेश शर्मा ने फायदे का लालच देकर रेत खनन में दो करोड़ रुपये लगाने के लिए कहा। जब राकेश ने फायदा नहीं दिया तो अश्विनी ने गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। राकेश ने गाजियाबाद कोर्ट से जमानत ले ली। जमानत आदेश को अश्विनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

आवेदक के वकील ने कहा कि आरोपी के खिलाफ जघन्य अपराधों में आपराधिक मामले दर्ज हैं और उस पर गुंडा एक्ट और यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत भी आरोप लगाए गए। साथ ही आरोपी के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा है। यह भी तर्क दिया कि आरोपी ने आवेदक के खिलाफ झूठा बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी को जमानत देने वाला ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया जाना चाहिए।

न्यायालय ने माना कि जमानत आदेश में विवेक का प्रयोग नहीं किया गया है। आरोप आर्थिक अपराध व जालसाजी से जुड़ा है। अन्य तथ्यों का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने जमानत रद्दीकरण अर्जी स्वीकार कर ली। कोर्ट ने राकेश शर्मा को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

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