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High Court : हाईकोर्ट में पेश प्रोफेसर मां बोली...पिता ने बच्चों को बना रखा है बंधक

Thu, 27 Mar 2025 05:25 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की अदालत ने मेरठ उन दो नाबालिग बच्चों की याचिका पर दिया है, जिन्हाेंने लखनऊ में रह रही मां को अदालत में बुलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पिता संग रह रहे बच्चे प्रोफेसर मां से भरण-पोषण की मांग करते हुए मेरठ के परिवार न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद अदालत में पेश हुई प्रोफेसर मां बोली पिता ने पिता ने बच्चों को बंधक बना रखा है। कोर्ट ने डीजीपी को लखनऊ पुलिस कमिश्नर से लेकर चौकी इंचार्ज तक की कार्यशैली पर तलब जांच रिपोर्ट चार हफ्ते में महानिबंधक के कार्यालय को सौंपने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की अदालत ने मेरठ उन दो नाबालिग बच्चों की याचिका पर दिया है, जिन्हाेंने लखनऊ में रह रही मां को अदालत में बुलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पिता संग रह रहे बच्चे प्रोफेसर मां से भरण-पोषण की मांग करते हुए मेरठ के परिवार न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं। नोटिस के बावजूद मां के नहीं आने पर परिवार न्यायालय ने विज्ञापन छपवाने का आदेश दिया था।

पैसे के अभाव में बच्चे हाईकोर्ट पहुंच गए। बच्चों के अधिवक्ता रजत एरन ने दलील दी कि पिता की आमदनी कम है, जबकि छह साल से अलग रह रही मां देहरादून में प्रोफेसर है। लिहाजा, वह उन्हें मां से भरण पोषण दिलाया जाएं। लेकिन मां कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहीं। इससे परिवार न्यायालय में लंबित मुकदमा निस्तारित नहीं हो पा रहा है।

बच्चों की गुहार पर कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर को दो बार मां को हाईकोर्ट में हाजिर करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया था कि आदेश को पढ़े व समझें बिना पुलिस अधिकारी आदेश को एक टेबल से दूसरे टेबल तक भेजते रहे। लेकिन मां को पेश नहीं कर सके। खफा कोर्ट ने मां को 25 मार्च तक हाजिर करने का आदेश देते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नर से लेकर चौकी इंचार्ज तक की कार्यशैली पर डीजीपी से रिपोर्ट तलब की थी।

कोर्ट की फटकार के बाद लखनऊ पुलिस ने मां को अदालत में पेश किया। अदालत पहुंची प्रोफेसर मां ने अपनी सफाई पेश की। कहा कि बच्चें अपनी मर्जी से पिता के साथ नहीं है। पिता ने उन्हें बंधक बना रखा है। वहीं, डीजीपी की ओर से बताया गया कोर्ट के आदेश पर लखनऊ के पुलिस कमिश्नर से लेकर चौकी प्रभारी चिनहट तक की जांच जारी है। न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण बच्चों के अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं हुए। लिहाजा, कोर्ट ने मां को फिर से अदालत में मौजूद रहने का हिदायत देते हुए मामले में सात अप्रैल की तारीख नियत कर दी। 

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