इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 लाख रुपये की रिश्वत व धमकी मामले में आरोपी पुलिस उपनिरीक्षक आलोक सिंह को चार महीने की अस्थायी जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने सह-आरोपी प्रिंस श्रीवास्तव को मिली जमानत के आधार पर दी गई है।
गोरखपुर के व्यवसायी नवीन कुमार श्रीवास्तव ने 9 अप्रैल, 2024 को कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि 3 अप्रैल 2024 की सुबह पुलिस उपनिरीक्षक आलोक सिंह और उनके साथियों ने उन्हें और उनके भाई को उनके साथ रखे 50 लाख रुपये के बैग के साथ रोक लिया। चुनावी आचार संहिता का हवाला देते हुए पैसे जब्त कर लिए और धमकी दी। बाद में 9 अप्रैल को आलोक सिंह से 30 लाख और सह-आरोपी प्रिंस श्रीवास्तव से 14 लाख रुपये बरामद हुए। इस मामले में पहली जमानत अर्जी खारिज होने की बाद आरोपी आलोक सिंह ने यह दूसरी जमानत अर्जी दायर की।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद आलोक सिंह को चार महीने की सशर्त अस्थायी जमानत दी गई। इसके साथ ही आलोक सिंह की ओर से याचिका दाखिल कर पुलिस स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूत जुटाने की मांग को खारिज कर दिया।
वहीं, इसी मामले में सह-आरोपी विशाल तिवारी एवं प्रचंड प्रताप सिंह की ओर से चार्जशीट और मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में दायर याचिकाएं भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान पीड़ित ने इन दोनों की भूमिका बताई है और इस स्तर पर साक्ष्य का सूक्ष्म विश्लेषण नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह अब किसी भी अनुचित स्थगन के बिना मुकदमे को शीघ्रता से निपटाए।