इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी जमीन का मालिकाना हक नक्शे से नहीं वैध दस्तावेजों से साबित होता है। दस्तावेजों के विपरीत क्षेत्रधिकार से बाहर किया गया भूमि आवंटन प्रारम्भतः शून्य माना जाएगा। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की एकलपीठ ने बुलंदशहर के स्याना स्थित गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा कमेटी की याचिका खारिज करते हुए नगर पालिका परिषद स्याना की याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही कोर्ट ने विवादित जमीन की प्रविष्टि 1975 से पूर्व की स्थिति में बहाल करते हुए भूमि प्रबंधन का जिम्मा नगर पालिका परिषद स्याना को सौंपा है।
मामला बुलंदशहर के सराय ग्राम सभा की लगभग दो बीघा भूमि से जुड़ा है। वर्ष 1975 में ग्राम सभा सराय ने अपने प्रस्ताव में इस भूमि का पट्टा गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा कमेटी के नाम स्वीकृत किया था, जिसे उपजिलाधिकारी ने 3 फरवरी 1975 को मंजूरी दी थी। बाद में गुल्लू शाह नामक व्यक्ति ने इस पट्टे को चुनौती देते हुए धारा 198(4) उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत निरस्तीकरण की कार्यवाही दायर की थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह मामला राजस्व न्यायालयों से होते हुए हाईकोर्ट पहुँचा।
नगर पालिका परिषद की अधिवक्ता तनीषा जहांगीर मुनीर ने दलील दी कि प्रश्नगत भूमि नगर पालिका परिषद के अधिकार क्षेत्र की है। गांव सभा को भूमि आवंटित करने का कोई विधिक अधिकार नहीं था। लिहाजा, यह आवंटन प्रारम्भतः शून्य है। कोर्ट ने नगर पालिका परिषद की याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही स्पष्ट किया कि बिना अधिकार क्षेत्र के किया गया ऐसा आवंटन “क्षेत्राधिकार से बाहर और प्रारंभतः शून्य माना जाएगा। लिहाजा, कोर्ट ने आगे से प्रश्नगत भूमि का प्रबंधन नगर पालिका परिषद करेगी।